बदायूं के सैजनी स्थित HPCL
बदायूं HPCL प्लांट हत्याकांड में नया खुलासा
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में स्थित सैजनी के HPCL प्लांट में 12 मार्च को हुए दो अधिकारियों की हत्या के मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह और उसके परिवार पर सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगा है। जानकारी के मुताबिक आरोपी के परिवार ने करीब 40 से 45 बीघा सरकारी तालाब की जमीन पर कब्जा कर रखा था और वहां पूरी मार्केट तक बना ली गई थी।
यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और तहसील प्रशासन ने अवैध कब्जे की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपी के परिवार से जुड़ी कई दुकानों और मकानों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है।
सरकारी तालाब और सड़क पर भी कब्जे का आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार अजय प्रताप सिंह और उसके परिवार ने गांव के दो सरकारी तालाबों पर कब्जा कर रखा है। राजस्व अभिलेखों में यह तालाब करीब 40 से 45 बीघा भूमि में दर्ज हैं। इतना ही नहीं, किसुनी महेरा जाने वाली लगभग 40 फुट चौड़ी सड़क पर भी अवैध कब्जा करने का आरोप है।
इसके अलावा बंजर जमीन पर भी कब्जा कर वहां 40 से 50 दुकानें बनाकर पूरा बाजार बसाया गया है। इन दुकानों के जरिए आरोपी परिवार का क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक दबदबा भी बढ़ गया था।
गांव में आरोपी परिवार का वर्चस्व
बताया जा रहा है कि आरोपी का परिवार लंबे समय से इलाके में प्रभावशाली माना जाता है। गांव के लोग उनके खिलाफ खुलकर बोलने से डरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार का इतना दबदबा है कि आज तक किसी ने भी उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं की।
इसी वजह से सरकारी जमीन पर कब्जा होने के बावजूद मामला वर्षों तक दबा रहा और प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
दो अधिकारियों की हत्या के बाद खुली परतें
12 मार्च को सैजनी स्थित HPCL प्लांट में घुसकर दो अधिकारियों को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान आरोपी अजय प्रताप सिंह और उसके परिवार से जुड़े
कई अन्य मामलों की भी जानकारी सामने आने लगी।
हत्या की घटना के बाद प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे कि आखिर इतने बड़े
अवैध कब्जे के बावजूद पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
हत्या की घटना के बाद तहसील प्रशासन ने अपनी कार्रवाई शुरू करते हुए आरोपी परिवार की
छह दुकानों और एक मकान को चिन्हित कर नोटिस चस्पा किया है। हालांकि घटना के तीन दिन बाद भी
अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले ही अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते तो
शायद हालात इतने गंभीर नहीं होते।
अब पूरे मामले में लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
यदि जांच में अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो
आरोपी परिवार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
