राजेश हाईटेक हॉस्पिटल संचालक
गोरखपुर में एक बार फिर बड़े स्तर पर वसूली का मामला सामने आया है। सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल के संचालक से मुख्यमंत्री के फर्जी ओएसडी और सीएमओ बनकर 18 लाख रुपये वसूलने की घटना ने प्रशासनिक और पुलिस तंत्र को हिला दिया है। संचालक ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर जांच कर रही है। मुख्य सवाल यह है कि तीन बार कॉल और संदेश करने वाला व्यक्ति एक ही था या अलग-अलग लोगों का गिरोह सक्रिय था?
घटना का पूरा क्रम
संचालक के अनुसार पहले तीन चरणों में फोन कॉल और व्हाट्सएप संदेश आए। कॉल करने वाले ने खुद को मुख्यमंत्री कार्यालय का ओएसडी बताया। उन्होंने कहा कि अस्पताल के कुछ नियमों में कमी है और सीएमओ दफ्तर से जांच होने वाली है। संचालक को डराया गया कि जांच में फंसने पर अस्पताल सील हो सकता है या लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
तीन चरणों में बातचीत के दौरान संचालक को भरोसा दिलाया गया कि मामला सुलझाया जा सकता है। इसके लिए “ऊपरी स्तर” पर मदद की जरूरत बताई गई। अंत में संचालक को बताया गया कि 18 लाख रुपये नकद लेकर सीएमओ दफ्तर के पास एक व्यक्ति को सौंप दें। चौथे चरण में संचालक ने नकदी लेकर निर्देशित जगह पर पहुंचे और पैसे सौंप दिए। पैसे लेने वाला व्यक्ति चला गया और उसके बाद कोई संपर्क नहीं हुआ।
संचालक की शिकायत और पुलिस जांच
संचालक ने जब मामले को समझा तो उन्हें लगा कि यह पूरी तरह ठगी है। उन्होंने तुरंत आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में फोन नंबर, व्हाट्सएप मैसेज स्क्रीनशॉट और अन्य विवरण दिए गए हैं। पुलिस ने मामला संज्ञान में लिया और जांच शुरू की।
रामगढ़ताल और सिकरीगंज थाना पुलिस की टीम अब निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच कर रही है:
- तीन बार कॉल करने वाले नंबर एक ही थे या अलग-अलग
- पैसे लेने वाले व्यक्ति की पहचान सीसीटीवी फुटेज से
- कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रेसिंग
- क्या यह अकेला व्यक्ति था या संगठित गिरोह
- फर्जी ओएसडी और सीएमओ के नाम इस्तेमाल करने वाले का नेटवर्क
पुलिस का कहना है कि यह मामला साइबर फ्रॉड और जालसाजी का मिश्रण है। आरोपी लोगों ने सरकारी पदों का दुरुपयोग कर भय पैदा किया और नकदी वसूली। जांच में तकनीकी टीम भी जुड़ी हुई है ताकि नंबरों का स्रोत और पैसे के ट्रांसफर (यदि कोई डिजिटल ट्रेस हो) का पता लगाया जा सके।
गोरखपुर में बढ़ते फर्जी वसूली के मामले
यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में गोरखपुर में फर्जी अफसर बनकर डॉक्टरों, अस्पताल संचालकों,
व्यापारियों और आम नागरिकों से वसूली के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे ठग सरकारी पदों के
नाम का इस्तेमाल कर लोगों को डराते हैं और नकद या ट्रांसफर से पैसे ऐंठते हैं
। पुलिस का कहना है कि ऐसे गिरोहों पर सख्त नजर रखी जा रही है।
संचालक का बयान और सलाह
हॉस्पिटल संचालक ने कहा कि वे डर के मारे
पहले पैसे दे बैठे, लेकिन बाद में समझ आया कि यह ठगी है।
उन्होंने अन्य लोगों से अपील की है कि सरकारी अफसरों के नाम पर आने वाले किसी भी
कॉल या मैसेज पर पैसे न दें। पहले सत्यापन करें और शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस ने भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
यदि कोई सरकारी पदाधिकारी के नाम पर फोन आए तो
सीधे आधिकारिक नंबर से संपर्क करें। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि
फर्जी कॉल और वसूली के खिलाफ जागरूकता और त्वरित शिकायत कितनी जरूरी है।