कुशीनगर में ऐतिहासिक पुनरुद्धार: पडरौना चीनी मिल फिर चलेगी
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक खुशखबरी है—पडरौना राज परिवार द्वारा 1920 में स्थापित प्रसिद्ध चीनी मिल दोबारा चालू होने की कवायद तेज हो गई है। यह मिल कभी क्षेत्र की आर्थिक धुरी थी, जो हजारों किसानों और मजदूरों को जोड़ती थी। अब स्थानीय प्रशासन, गन्ना विभाग और उद्योगपतियों की संयुक्त पहल से इसका पुनरुद्धार सुनिश्चित हो रहा है। मार्च 2026 तक यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत देगी और सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार का द्वार खोलेगी। पडरौना राज परिवार की यह विरासत आधुनिक तकनीक के साथ नई जिंदगी पाएगी।
कुशीनगर चीनी मिल का गौरवशाली इतिहास
1920 में पडरौना राज परिवार ने इस मिल की स्थापना की, जब गन्ना उत्पादन क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा था। ब्रिटिश काल में यह हजारों किसानों को जोड़ने वाली प्रमुख इकाई थी। बाद में बंद होने के बावजूद इसकी जमीन और विरासत बची रही। अब ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजनाओं के तहत पुनर्जीवित करने के प्रयास तेज हैं। जिला मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में हालिया बैठकों में भूमि विवाद (150 एकड़ पर गड़बड़ी) की जांच पूरी हुई, निवेशक आगे आए हैं। यह कदम न केवल रोजगार बढ़ाएगा, बल्कि गन्ना किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगा। कुशीनगर जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में यह विकास की नई मिसाल बनेगा।
रोजगार वृद्धि: 600+ नई नौकरियां और अप्रत्यक्ष फायदा
मिल चालू होते ही 600 से अधिक सीधे रोजगार सृजित होंगे—कुशल इंजीनियर, तकनीशियन, मजदूर, प्रशासनिक स्टाफ और ट्रांसपोर्ट वर्कर्स शामिल। अप्रत्यक्ष रूप से हजारों गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा, क्योंकि खरीद बढ़ेगी और MSP पर बेहतर मूल्य मिलेगा। स्थानीय युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम भी शुरू होंगे। बेरोजगारी दर घटीगी, ग्रामीण प्रवासन रुकेगा। पडरौना राज परिवार ने ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध कराकर सहयोग किया है। यह परियोजना कुशीनगर के युवाओं और किसानों के लिए बड़ी उम्मीद है।
प्रोजेक्ट की तेज प्रगति और आधुनिकीकरण
हाल ही में सर्वे पूरा हुआ, पर्यावरण मंजूरी मिल गई। आधुनिक मशीनरी आयात हो रही है, जो उत्पादन क्षमता दोगुनी कर देगी। सरकार सब्सिडी, लोन और इंसेंटिव दे रही है। पडरौना क्षेत्र गन्ना बेल्ट का केंद्र बनेगा—देवरिया, महराजगंज
जैसे आसपास के जिलों से भी आपूर्ति होगी। मिल चालू होने से स्थानीय बाजार फलेगा-फूलेगा, व्यापार बढ़ेगा।
यह उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति का उत्कृष्ट उदाहरण है। सरकार का लक्ष्य 2026 में पूर्ण चालू करना है।
पडरौना राज परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका
1920 में राजा साहब ने इसे बनवाया, जो आजादी आंदोलन से जुड़े थे।
परिवार ने मिल की जमीन बचाई और अब पुनर्विकास में सक्रिय सहयोग कर रहा है।
यह न केवल आर्थिक, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुद्धार भी है।
मिल से ऐतिहासिक इमारतें पर्यटन बढ़ाएंगी। कुल मिलाकर, कुशीनगर में चीनी मिल दोबारा चालू होना रोजगार क्रांति लाएगा।
600 नौकरियां, आर्थिक उछाल और पडरौना राज परिवार की 1920 की विरासत
नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी। यह खबर स्थानीय निवासियों के लिए बेहद उत्साहजनक है।