
खामेनेई की मौत: दुनिया को हिलाने वाली घटना
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली खामेनेई की अचानक मौत ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। 28 फरवरी 2026 को US और इजराइल के संयुक्त मिसाइल हमलों में तेहरान स्थित उनके कंपाउंड/दफ्तर में वे मौजूद थे, जब हमला हुआ। ईरानी मीडिया ने इसे ‘शहादत’ करार दिया, जबकि पश्चिमी स्रोतों ने इसे इजराइल-समर्थित ऑपरेशन बताया। खामेनेई 1989 से इस पद पर थे और अमेरिका-इजराइल विरोधी नीतियों से ईरान को मजबूत बनाया था। उनकी मौत ने ईरान की राजनीतिक अस्थिरता को उजागर किया है।
घटना की टाइमलाइन: दफ्तर में क्या हुआ?
सोमवार दोपहर करीब हमले के दौरान खामेनेई अपने तेहरान स्थित आधिकारिक कंपाउंड में थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे महत्वपूर्ण बैठक में थे। अचानक मिसाइल स्ट्राइक हुई, जिसमें कंपाउंड का हिस्सा ध्वस्त हो गया। शुरुआत में इसे गैस लीक बताया गया, लेकिन सैटेलाइट इमेज और खुफिया रिपोर्ट्स से साफ हुआ कि यह US-इजराइल का संयुक्त ऑपरेशन था। सुरक्षाकर्मियों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन हमले की तीव्रता से खामेनेई घायल हो गए। मेडिकल टीमों ने अस्पताल पहुंचाया, लेकिन जल्द ही मौत की पुष्टि हुई। ईरानी राज्य मीडिया ने 1 मार्च को मौत की घोषणा की और 40 दिन का शोक घोषित किया।
मौत के पीछे साजिश: कौन जिम्मेदार?
ईरानी अधिकारियों ने इसे ‘विदेशी दुश्मनों की साजिश’ बताया, जिसमें CIA और मोसाद का हाथ माना जा रहा है। खामेनेई ने हाल ही में इजराइल के खिलाफ चेतावनी दी थी। आंतरिक रूप से भी कुछ सुधारवादी गुटों पर शक है। फॉरेंसिक रिपोर्ट्स में विस्फोटक के निशान मिले। अंतरराष्ट्रीय मीडिया जैसे BBC, CNN और NPR ने इसे ‘ईरान के लिए ब्लैक स्वान इवेंट’ कहा। खामेनेई की मौत ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और क्षेत्रीय प्रभाव को प्रभावित किया है।
दुनिया की प्रतिक्रिया: वैश्विक झटका
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मौत की पुष्टि की और इजराइल के साथ हमलों को जस्टिफाई किया।
इजराइल ने कोई टिप्पणी नहीं की। भारत ने शोक जताया,
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ईरान के साथ ऐतिहासिक रिश्ते मजबूत रहेंगे।
रूस और चीन ने इसे ‘आतंकवाद’ करार दिया। खाड़ी देशों में तनाव बढ़ा, सऊदी अरब ने सीमाएं सील कीं।
तेल कीमतें 5% उछलीं। ईरान में शोक और विरोध प्रदर्शन दोनों हुए—कुछ जगहों पर जश्न भी मनाया गया।
उत्तराधिकारी और ईरान का भविष्य
खामेनेई के बेटे मोज्तबा खामेनेई या अन्य वरिष्ठ नेता संभावित उत्तराधिकारी हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सत्ता संघर्ष भड़क सकता है।
ईरान अब नई राह चुनने को मजबूर है। यह घटना मध्य पूर्व की भू-राजनीति को हमेशा बदल देगी।
ईरान ने बदले की कसम खाई है, जबकि क्षेत्र युद्ध के कगार पर है।
