प्रयागराज में लेखपाल भ्रष्टाचार का खुलासा: 2 लाख की रिश्वत मांग प्रयागराज जिले में राजस्व विभाग के लेखपालों पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि मकान निर्माण के लिए आवश्यक दस्तावेजों को मंजूरी देने के नाम पर उनसे दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। यह घटना प्रयागराज के ग्रामीण इलाके में घटी, जहां एक आम नागरिक अपना घर बनाने की प्रक्रिया में फंस गया। शिकायतकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “लेखपालों ने साफ कहा- अगर मकान बनाना है तो दो लाख रुपये देने होंगे, वरना फाइल अटक जाएगी।” यह मामला उत्तर प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलता है, खासकर राजस्व विभाग में जहां भूमि और निर्माण संबंधी कार्यों में पारदर्शिता की कमी लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। प्रयागराज प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कर दी है, लेकिन स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या दोषियों को सजा मिलेगी।
शिकायतकर्ता की परेशानी: मकान निर्माण की प्रक्रिया में रुकावट
शिकायतकर्ता प्रयागराज के एक छोटे से गांव का निवासी है, जो वर्षों से अपना पक्का मकान बनाने का सपना देख रहा था। उसने बताया कि उसने जमीन के नक्शा पास कराने और चकबंदी संबंधी दस्तावेज जमा किए थे। लेकिन लेखपालों ने फाइल को बार-बार लटकाया और निजी तौर पर मिलने को कहा। “पहले 50 हजार मांगे, फिर 1 लाख, अंत में 2 लाख पर अड़े,” शिकायतकर्ता ने खुलासा किया। उत्तर प्रदेश में मकान निर्माण के लिए राजस्व विभाग से नक्शा स्वीकृति, खाता-खेसरा सुधार और भूमि उपयोग प्रमाणपत्र जरूरी होता है। इन प्रक्रियाओं में देरी आम है, लेकिन रिश्वत की मांग अब खुलेआम हो गई है। प्रयागराज जैसे जिले में सैकड़ों लोग इसी तरह प्रभावित हैं, जो गरीबी में जी रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे। यह घटना न केवल एक व्यक्ति की कहानी है, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाती है। स्थानीय एसडीएम ने जांच टीम गठित की है।
राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें: प्रयागराज का पुराना इतिहास
प्रयागराज में लेखपाल भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं। पिछले वर्षों में कई मामले सामने आए हैं, जहां जमीन विवाद, नक्शा पास न करने और रिश्वत लेने के आरोप लगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए हैं जैसे भूलेख और ई-स्वीकृति, लेकिन ग्रामीण स्तर पर लेखपाल ही अंतिम कड़ी हैं। वे फिजिकल वेरिफिकेशन करते हैं, जिसका दुरुपयोग आसान है। इस मामले में दो लेखपालों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने शिकायतकर्ता को धमकी भी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों की कमी, ट्रेनिंग की कमी और कम वेतन भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। प्रयागराज डिवीजन में 2025 में 50 से अधिक शिकायतें रिश्वत के खिलाफ दर्ज हुईं। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बावजूद अमल नहीं हो रहा। अब यह मामला लोकायुक्त तक पहुंच सकता है
भ्रष्टाचार मुक्त प्रयागराज की मांग
यह रिश्वतकांड प्रयागराजवासियों के लिए सबक है। लेखपालों की मनमानी से गरीबों का घर टूट रहा है। सरकार को डिजिटलीकरण तेज करना चाहिए ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो। स्थानीय विधायक ने सदन में मामला उठाने की घोषणा की