गोरखपुर प्रसूता मौत
गोरखपुर जिले के बड़हलगंज क्षेत्र में सिया मैटरनिटी सेंटर (निजी अस्पताल) में 16-17 फरवरी 2026 को एक प्रसूता की मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। 29 वर्षीय प्रिया तिवारी (पति शशांक तिवारी उर्फ गोलू) महुलिया पोयल निवासी थीं। परिवार ने डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही और गलत इलाज का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, जबकि अस्पताल संचालक (महिला चिकित्सक) स्टाफ सहित फरार हो गईं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया है।
घटना का क्रम
प्रिया तिवारी को 16 फरवरी 2026 की सुबह गर्भावस्था के अंतिम चरण में सिया मैटरनिटी सेंटर में भर्ती कराया गया। दोपहर करीब 12:22 बजे ऑपरेशन (सी-सेक्शन) के बाद जच्चा-बच्चा को बाहर लाया गया। परिवार को पुत्र जन्म की खुशखबरी दी गई, लेकिन प्रिया की हालत गंभीर बनी रही। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने खून की कमी बताते हुए पहले एक यूनिट ब्लड और फिर दूसरी यूनिट की मांग की। शाम तक मरीज को तेज दर्द, घबराहट और बेचैनी की शिकायत हुई। आरोप है कि अंदरूनी रक्तस्राव की आशंका पर पूछने पर डॉक्टर ने इसे नकार दिया।
शाम करीब 7:30 बजे दूसरी यूनिट ब्लड लाने के दौरान हालत और बिगड़ गई। परिवार का दावा है कि डॉक्टर स्टाफ सहित अस्पताल छोड़कर चली गईं। घबराए परिजनों ने प्रिया को तत्काल नजदीकी दुर्गावती अस्पताल ले जाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बच्चा सुरक्षित है, लेकिन मां की मौत से परिवार सदमे में है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही से मौत (BNS धारा 106(1)) का मुकदमा दर्ज किया। प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार राय ने सीएमओ गोरखपुर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़हलगंज से मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच कराने की मांग की। स्वास्थ्य अधिकारी श्रवण तिवारी ने बताया कि निरीक्षण में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण नहीं पाया गया, इसलिए इसे सील कर दिया गया। संचालक फरार होने पर तलाश जारी है।
परिवार का गुस्सा और मांग
परिजन डॉक्टर की गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार से इनकार कर रहे हैं। वे गलत इलाज, देरी और
अस्पताल छोड़कर भागने का आरोप लगा रहे हैं। परिवार का कहना है कि अगर समय पर
रेफर किया जाता तो प्रिया बच सकती थीं। यह घटना निजी अस्पतालों में
लापरवाही और अवैध संचालन पर सवाल उठाती है। गोरखपुर में ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं,
जहां अवैध या कम योग्यता वाले केंद्रों में मौतें हुईं।
मातृ स्वास्थ्य पर सवाल
प्रिया तिवारी की मौत ने एक बार फिर यूपी में निजी स्वास्थ्य
सुविधाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।
सरकार से अपील है कि ऐसे केंद्रों पर सख्त निगरानी हो और लापरवाही करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।
परिवार को न्याय मिले और बच्चे को सुरक्षित भविष्य। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे।
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