नीलगायों की बढ़ती संख्या किसानों के लिए बनी मुसीबत, फसलें हो रहीं बर्बाद | उत्तर प्रदेश में नीलगाय संकट 2026

पूर्वांचल में नीलगायों का बढ़ता आतंक

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज जैसे पूर्वांचल जिलों में नीलगायों (नीलगाय) की बढ़ती संख्या किसानों के लिए गंभीर संकट बन गई है। रातों-रात खेतों में घुसकर ये जानवर धान, गेहूं, सरसों, चना, सब्जियां और अन्य फसलों को चर जाते या रौंद देते हैं। गोरखपुर के खजनी, पाली और चौरीचौरा क्षेत्रों में किसान बताते हैं कि नीलगाय झुंड में आकर 50 बीघा तक फसल बर्बाद कर देते हैं। स्थानीय किसान रामप्रताप सिंह कहते हैं, “पिछले सीजन में 10 एकड़ धान की फसल नीलगायों ने तबाह कर दी। अब रबी फसलें भी खतरे में हैं।” 2025-26 में पूर्वी यूपी में नीलगाय समस्या से लाखों हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई, जिससे किसानों को लाखों का आर्थिक नुकसान हो रहा है।

नीलगायों की संख्या क्यों बढ़ रही है?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों की कटाई, शहरीकरण और आवास हानि ने नीलगायों को खेतों की ओर धकेला है। ये शाकाहारी जानवर रात में सक्रिय होते हैं और तेज दौड़ने की क्षमता रखते हैं। गोरखपुर जिले में 2026 की शुरुआत में नीलगायों की संख्या 20 हजार से अधिक अनुमानित है। जलवायु परिवर्तन से फसल चक्र प्रभावित होने और फसल अवशेषों की कमी से ये जानवर खेतों पर निर्भर हो गए हैं। पूर्वांचल में नीलगायों के साथ लावारिस पशु भी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसान कड़ाके की ठंड में रातभर रखवाली करने को मजबूर हैं।

फसलों पर भारी नुकसान और आर्थिक संकट

नीलगाय फसल नुकसान से किसानों को सालाना सैकड़ों करोड़ का चूना लग रहा है। गोरखपुर के पाली और तुर्कवलिया क्षेत्रों में गेहूं, चना, आलू, लहसुन और हरी सब्जियां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पैदावार 30-40% तक कम हो जाती है। कई किसान खेती छोड़ने की कगार पर हैं। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार, राज्य स्तर पर नीलगाय समस्या से सालाना 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। प्रभावित किसान मुआवजे के लिए भटकते हैं, लेकिन प्रक्रिया जटिल और धीमी है।

सरकारी प्रयास अपर्याप्त, किसान नाराज

सरकार ने नीलगाय को ‘वरमिन’ घोषित कर हथियार लाइसेंस और शिकार अभियान चलाए हैं। गोरखपुर डीएम ने हाल ही में अभियान में सैकड़ों नीलगाय मारीं, लेकिन समस्या रुकने का नाम नहीं ले रही है। किसान संगठन केंद्रीय हस्तक्षेप और त्वरित मुआवजा मांग रहे हैं। गोरखपुर किसान संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाड़ेबंदी, सोलर फेंसिंग और जागरूकता अभियान जरूरी हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशों का स्थानीय स्तर पर कमजोर कार्यान्वयन समस्या बढ़ा रहा है।

समाधान के प्रभावी उपाय

नीलगाय फसल नुकसान रोकने के लिए व्यावहारिक उपाय:

  • सोलर पावर्ड इलेक्ट्रिक फेंसिंग: सस्ती और प्रभावी, खेतों की सुरक्षा।
  • अल्ट्रासोनिक डिवाइस और डराने वाले उपकरण: फसल अवशेषों से बने।
  • जैविक प्रतिकारक: नेम तेल का छिड़काव।
  • पशु आश्रय: वन विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में।
  • मुआवजा योजना मजबूत: PMFBY में जंगली जानवरों से नुकसान कवरेज (खरीफ 2026 से)। गोरखपुर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार सुझाते हैं कि सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और तकनीकी सहायता से समस्या नियंत्रित हो सकती है।

किसानों की मांग और भविष्य

पूर्वांचल के किसान धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ,

तो खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी। केंद्र-राज्य मिलकर संतुलित नीति बनाएं।

पर्यावरण प्रेमी भी चिंतित हैं, लेकिन फसल सुरक्षा प्राथमिकता है।

तत्काल कार्रवाई से किसान बचेंगे

नीलगाय समस्या उत्तर प्रदेश का गंभीर मुद्दा है। गोरखपुर जैसे क्षेत्रों में त्वरित

कदम उठाकर फसल बर्बादी रोकी जा सकती है।

किसान समृद्ध होंगे तभी देश मजबूत होगा। सरकार को किसानों की आवाज सुननी चाहिए।