मोहन भागवत ने पढ़ाया एकता का पाठ: हिंदू समाज फूट से हारा, एकजुटता से बनेगा अजेय भारत

एकता की पुकार से समाज जागरण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हाल के महीनों में वृंदावन, छत्तीसगढ़ और भोपाल जैसे स्थानों पर दिए भाषणों में हिंदू समाज की एकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बार-बार कहा कि हिंदू समाज कभी बाहरी शक्तियों की वीरता से नहीं हारा, बल्कि आंतरिक फूट और विभाजन के कारण पराजित हुआ। एकजुट हिंदू समाज ही सनातन परंपरा को मजबूत करेगा और भारत को विश्वगुरु बनाएगा। RSS के शताब्दी वर्ष में यह संदेश विशेष प्रासंगिक है, जहां सीमाओं पर चुनौतियां और सामाजिक सद्भाव की जरूरत बढ़ गई है।

वृंदावन भाषण: फूट का राज खोला

जनवरी 2026 में वृंदावन के सुदामा कुटी आश्रम शताब्दी महोत्सव में मोहन भागवत ने कहा, “हिंदू समाज कभी दूसरों के शौर्य से नहीं हारा, बल्कि फूट की वजह से हार गया।” उन्होंने चेतावनी दी कि विभाजनकारी शक्तियां लगातार साजिशें रचती हैं, लेकिन एकजुट सनातन समाज इनके टुकड़े कर देगा। भागवत ने ऐतिहासिक उदाहरणों से समझाया कि संगठित समाज राष्ट्र का भाग्य बदल सकता है। उन्होंने जोर दिया कि भारत हिंदू राष्ट्र और धर्म राष्ट्र रहेगा, और आने वाले 20-30 वर्षों में विश्वगुरु बनकर सुख-शांति प्रदान करेगा। यह भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जहां उन्होंने भेदभाव खत्म करने और समावेशी समाज बनाने की अपील की।

छत्तीसगढ़ हिंदू सम्मेलन: समरसता और मंगल संवाद का मंत्र

31 दिसंबर 2025 को रायपुर के सोनपैरी (असंग देव कबीर आश्रम) में हिंदू सम्मेलन में भागवत ने कहा, “देश सबका है, जाति-धन-भाषा से ऊपर उठें।” सभी को एक-दूसरे जैसा समझें, मंदिर-पानी सबके लिए खुले रहें। उन्होंने परिवार में साप्ताहिक भोजन, प्रार्थना और चर्चा से अकेलापन दूर करने की सलाह दी। मंडल स्तर पर हिंदू एकजुट हो रहे हैं, जो RSS शताब्दी का संदेश है। उन्होंने भाषा सीखने की अपील की—घर में मातृभाषा और अन्य राज्यों की भाषा अपनाएं। यह व्यावहारिक समरसता समाज को मजबूत बनाएगी और पंच परिवर्तन से राष्ट्र उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा।

भोपाल युवा संवाद: एकता से बड़ा भारत बनेगा

2 जनवरी 2026 को भोपाल में युवा संवाद में भागवत ने कहा, “एकता और गुणवत्ता वाला समाज भारत को बड़ा बनाएगा।” यह संघ का नहीं, समाज का कार्य है। आने वाले समय में एकजुट वातावरण बनाना हमारी भूमिका है। उन्होंने धर्म-संस्कृति संरक्षण और भारत को परम वैभव पर ले जाने का लक्ष्य दोहराया। विश्व सत्य नहीं, शक्ति सुनता है—यह संदेश युवाओं को प्रेरित करने वाला था।

एकता के अनमोल वचन और ऐतिहासिक संदर्भ

भागवत के प्रमुख उद्धरण: “संगठित समाज ही भाग्य परिवर्तन की कुंजी है।” “

सृष्टि की सारी विविधता में एकता का रूप है।” “हिंदू एक जीवन दृष्टि है, विचार है, जीवन शैली है।”

उन्होंने कहा कि भारत में सभी भारतीय हिंदू हैं क्योंकि पूर्वज एक हैं।

प्रतिस्पर्धा स्वस्थ हो, युद्ध नहीं। मई 2025 से जारी यह संदेश सीमाओं पर सक्रिय बुरी ताकतों के खिलाफ

अजेय शक्ति की मांग करता है। संघ प्रार्थना में ‘अजय्यं च विश्वस्य देहि मे शक्ति’ इसी का प्रतीक है।

सद्भाव के लिए सभी को त्याग जरूरी, एकतरफा प्रयास नहीं चलेगा।

एकता से विश्व गुरु बनने का आह्वान

मोहन भागवत का एकता का पाठ जाति, भाषा, धन से ऊपर उठकर समाज निर्माण का आह्वान है।

फूट त्यागें, संगठित हों तो भारत अजेय बनेगा और

विश्व गुरु की भूमिका निभाएगा। RSS के 100 वर्ष इसकी गवाही देते हैं।

यह संदेश न सिर्फ हिंदू समाज को, बल्कि पूरे राष्ट्र को मजबूत बनाने का संकल्प है।