गोरखपुर में एक्सप्रेसवे भूमि अधिग्रहण विवाद: 86 किमी हिस्से के लिए 133 गांवों में बैनामा-खरीद-फरोख्त पर रोक, किसान बोले – मुआवजा नहीं मिला तो कैसे जिएंगे? प्रशासन से हटाने की मांग

गोरखपुर, 30 जनवरी 2026: गोरखपुर मंडल में पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के चलते प्रभावित 133 गांवों में जमीनों के क्रय-विक्रय पर लगी रोक ने किसानों और स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष पैदा कर दिया है। सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर और कुशीनगर जिलों के इन गांवों में प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने के बाद बैनामा, उपयोग परिवर्तन और अनधिकृत निर्माण पर पूर्ण रोक लगा दी है। अब प्रभावित परिवारों ने इस रोक को तुरंत हटाने की मांग की है, क्योंकि मुआवजा अभी तक नहीं मिला और जमीन बेचकर वे अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

रोक क्यों लगी? एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का हिस्सा

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा 747 किमी लंबे पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे का गोरखपुर मंडल में 86.24 किमी हिस्सा प्रस्तावित है। इस खंड में 133 गांव प्रभावित हैं। प्रशासन ने अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए इन गांवों में जमीन के किसी भी प्रकार के लेन-देन पर रोक लगा दी। एसडीएम और सब-रजिस्ट्रार को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी बैनामा या रजिस्ट्री न हो।

किसानों का कहना है कि रोक के कारण वे अपनी जमीन नहीं बेच पा रहे हैं, जबकि मुआवजा प्रक्रिया में देरी हो रही है। कई परिवारों को शादी-ब्याह, इलाज और बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत है। एक प्रभावित किसान ने बताया, “हमारी जमीन एक्सप्रेसवे में जाएगी, लेकिन मुआवजा कब मिलेगा? रोक लगी है तो जमीन बेच भी नहीं सकते। सरकार हमें बीच में लटका रही है।”

प्रभावित परिवारों की मांग और आक्रोश

गोरखपुर के विभिन्न गांवों में किसान और स्थानीय लोग अब संगठित हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है:

  • रोक तुरंत हटाई जाए।
  • मुआवजा प्रक्रिया तेज की जाए।
  • बाजार मूल्य के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए।
  • प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक रोजगार या प्लॉट दिए जाएं।

संतकबीरनगर के एक किसान संघ ने कहा, “एक्सप्रेसवे विकास के लिए अच्छा है, लेकिन हमारी जिंदगी बर्बाद नहीं होनी चाहिए। रोक हटाओ, मुआवजा दो।” कई परिवारों ने धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।

प्रशासन का पक्ष और आगे की राह

गोरखपुर के डीएम ने बताया कि रोक अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लगाई गई है, ताकि कोई

जमीन हस्तांतरण में हेराफेरी न हो। मुआवजा निर्धारण का सर्वेक्षण चल रहा है और

जल्द ही प्रभावितों को सूचित किया जाएगा।

NHAI की टीम गोरखपुर पहुंचकर किसानों से बातचीत कर रही है।

प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उचित मुआवजा और पारदर्शिता से काम होगा।

यह मुद्दा गोरखपुर मंडल में विकास बनाम किसान हित की बहस को तेज कर रहा है। यदि रोक नहीं हटी तो

आंदोलन की आशंका बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि विकास जरूरी है,

लेकिन उनकी आजीविका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

प्रशासन और NHAI को जल्द संतुलित कदम उठाने होंगे।