बहराइच से रेस्क्यू नर बाघ गोरखपुर चिड़ियाघर पहुंचा
रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता: बाघ सुरक्षित पहुंचा
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में मानव बस्ती में घुस आए एक नर बाघ को वन विभाग ने 72 घंटे के कड़े ऑपरेशन के बाद रेस्क्यू किया। यह बाघ रेहुआ मंसूर गांव के आसपास खेतों और झाड़ियों में घूम रहा था, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी। ट्रैंक्विलाइजर डार्ट से बेहोश कर सुरक्षित पिंजरे में बंद किया गया।
सोमवार को इस बाघ को गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (गोरखपुर चिड़ियाघर) लाया गया। वन विभाग की टीम ने विशेष देखभाल के साथ ट्रांसपोर्ट किया। बाघ की उम्र करीब 8 साल बताई जा रही है। यहां पहुंचते ही उसे क्वारंटीन सेक्शन में रखा गया, जहां स्वास्थ्य जांच और निगरानी होगी।
क्वारंटीन का महत्व: स्वास्थ्य और अनुकूलन
क्वारंटीन में रखने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि नए वातावरण में जानवर को तनाव हो सकता है। यहां वेटरनरी डॉक्टर उसकी जांच करेंगे – कोई बीमारी, चोट या परजीवी तो नहीं। खान-पान की व्यवस्था भी की गई है। बाघ स्वस्थ होने पर मुख्य बाड़े में शिफ्ट होगा, जहां पर्यटक देख सकेंगे।
यह कदम मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मददगार साबित होगा। बाघ को जंगल में छोड़ने की जगह न होने (कतर्नियाघाट में स्पेस नहीं) के कारण चिड़ियाघर भेजा गया। इससे ग्रामीणों को राहत मिली और बाघ को सुरक्षित जीवन।
गोरखपुर चिड़ियाघर की विशेषता: पहले भी 3 बाघिनें आईं
गोरखपुर चिड़ियाघर वन्यजीव रेस्क्यू का प्रमुख केंद्र बन चुका है। पहले भी बहराइच और अन्य इलाकों से 3 बाघिनें यहां लाई जा चुकी हैं। ये बाघिनें सफलतापूर्वक अनुकूलित हो गईं और अब यहां रहकर प्रजनन भी कर रही हैं।
चिड़ियाघर में बाघों के लिए बड़ा और प्राकृतिक जैसा बाड़ा है। यहां पहले पीलीभीत से आए
केसरी टाइगर और अन्य रेस्क्यू जानवर भी हैं।
योगी सरकार की वन्यजीव संरक्षण नीतियों के तहत ऐसे रेस्क्यू बढ़ रहे हैं।
गोरखपुर चिड़ियाघर अब यूपी का प्रमुख हब बन गया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष: बढ़ती चुनौती और समाधान
बहराइच में बाघ का घुसना जंगल कटाई, मानव अतिक्रमण और शिकार जैसी वजहों से होता है।
पिछले दिनों भेड़ियों और तेंदुओं के हमले भी हुए थे।
वन विभाग ड्रोन, हाथी (सुलोचना-डायना) और शार्प शूटर के साथ ऑपरेशन चलाता है।
ऐसे रेस्क्यू से दोनों तरफ सुरक्षा बढ़ती है। बाघ को मारने की बजाय बचाना प्राथमिकता है।
गोरखपुर चिड़ियाघर जैसे केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भविष्य की उम्मीद: संरक्षण और जागरूकता
यह घटना वन्यजीव संरक्षण का अच्छा उदाहरण है। बाघ अब सुरक्षित है और पर्यटक उसे देख सकेंगे।
वन विभाग को और संसाधन देने की जरूरत है।
ग्रामीणों को जागरूक करना भी जरूरी – जानवरों के क्षेत्र में न जाना, रिपोर्ट करना।