मायावती जन्मदिन 2026
मायावती का जन्मदिन 2026: BSP सुप्रीमो ने दोहराया अटल संकल्प, दबाव और लालच में नहीं झुकेंगी
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो कुमारी मायावती ने 15 जनवरी 2026 को अपने जन्मदिन के अवसर पर एक बार फिर अपने तेवर बरकरार रखते हुए कार्यकर्ताओं में जोश भरा। पार्टी के सामने वजूद पर संकट के बाद भी मायावती ने स्पष्ट कहा कि वे कभी झुकने वाली नहीं हैं और किसी दबाव या लालच में पार्टी के मूवमेंट से पीछे नहीं हटेंगी। लखनऊ में आयोजित जन्मदिन कार्यक्रम में हजारों कार्यकर्ता जुटे, जहां मायावती ने बहुजन समाज की एकता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
BSP के सामने चुनौतियां, लेकिन मायावती का अटल इरादा
पिछले कुछ वर्षों में BSP को कई राजनीतिक झटके लगे हैं। 2022 और 2024 के चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा से कम रहा, जिससे वजूद पर संकट की बातें होने लगीं। गठबंधन की असफलताएं, कार्यकर्ताओं का पलायन और विपक्षी दलों की साजिशों ने पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की। लेकिन मायावती ने जन्मदिन पर इन सबको दरकिनार करते हुए कहा, “मैं कभी झुकने वाली नहीं हूं। बहुजन समाज की लड़ाई मेरी जिंदगी का मिशन है।”
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे संगठित रहें और बहुजन हितों की रक्षा के लिए एकजुट हों। मायावती ने याद दिलाया कि BSP की स्थापना कांशीराम जी द्वारा दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए की गई थी, और यह मूवमेंट किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर है।
जन्मदिन पर जोश भरा संदेश: दबाव और लालच से दूर रहें
कार्यक्रम में मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्षी दल BSP को तोड़ने के लिए दबाव और लालच का सहारा ले रहे हैं। लेकिन वे किसी भी साजिश में नहीं फंसेंगी। “किसी दबाव या लालच में पार्टी के मूवमेंट से पीछे नहीं हटूंगी,” यह शब्द कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर गए। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी पर जोर दिया और कहा कि BSP अकेले लड़ेगी और पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आएगी।
मायावती ने अपने भाषण में बहुजन समाज की एकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दलित, ओबीसी और मुस्लिम समाज की एकजुटता ही BSP की ताकत है। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करें और पार्टी की विचारधारा को फैलाएं।
मायावती का राजनीतिक सफर: संघर्ष से सत्ता तक
*मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को हुआ था। वे चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं।
BSP की स्थापना 1984 में कांशीराम द्वारा की गई थी, और मायावती 2003 से पार्टी की सुप्रीमो हैं।
उनके कार्यकाल में अम्बेडकर गांव योजना, दलित स्मारकों का निर्माण और सामाजिक न्याय की कई योजनाएं लागू हुईं।
जन्मदिन पर उन्होंने इन उपलब्धियों को याद किया और कहा कि संघर्ष जारी रहेगा।
कार्यकर्ताओं ने मायावती के इस संकल्प से प्रेरित होकर नारे लगाए।
कार्यक्रम में BSP की मजबूती और 2027 चुनावों में जीत का संकल्प लिया गया।
BSP की आगे की रणनीति: एकता और संघर्ष
मायावती ने जन्मदिन पर स्पष्ट किया कि BSP किसी गठबंधन में नहीं जाएगी।
उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे BSP को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं,
लेकिन पार्टी का तेवर बरकरार रहेगा।
कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि बहुजन समाज की ताकत से ही परिवर्तन आएगा।
यह जन्मदिन BSP के लिए नई शुरुआत का प्रतीक बना।
वजूद पर संकट के बीच मायावती का यह संदेश पार्टी कैडर में नई जान फूंक सकता है।