मेरठ कपसाड़ कांड में
कपसाड़ कांड में नया मोड़
मेरठ के कपसाड़ कांड ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। इस सनसनीखेज मामले के मुख्य आरोपी पारस सोम ने जेल में बड़ा दावा किया है। पारस ने जेल अधिकारियों से कहा – “मैं नाबालिग हूं… सबूत दिखा दूंगा, मेरी मदद कीजिए। कोर्ट में नाबालिग होने का प्रमाण-पत्र दे दूंगा।”
यह बयान सुनकर पुलिस और समाज में हड़कंप मच गया है। अगर पारस का दावा सही साबित हुआ तो मामले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
घटना का संक्षिप्त पृष्ठभूमि
मेरठ के कपसाड़ इलाके में हुई इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। पारस सोम पर गंभीर आरोप लगे थे, जिसमें नाबालिग बच्ची के साथ क्रूरता और अन्य आपराधिक धाराएं शामिल थीं। पुलिस ने पारस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन अब जेल में रहते हुए पारस ने अपना बचाव शुरू कर दिया है।
उसने जेल प्रशासन से कहा कि वह नाबालिग है और उसके पास उम्र का प्रमाण-पत्र है। पारस ने मांग की कि उसे बाल सुधार गृह में शिफ्ट किया जाए, न कि सामान्य जेल में।
जेल प्रशासन की कार्रवाई
जेल नियमों के अनुसार, जब कोई आरोपी नाबालिग होने का दावा करता है तो उसे तुरंत मुलाहिजा बैरक (अवलोकन बैरक) में रखा जाता है। पारस सोम को भी फिलहाल 10 दिनों के लिए मुलाहिजा बैरक में रखा गया है।
इस बैरक में वर्तमान में 67 बंदी हैं, जिनमें से अधिकांश नाबालिग होने का दावा करने वाले या जांच के दौरान हैं। इन 10 दिनों में जेल प्रशासन, पुलिस और बाल कल्याण समिति मिलकर पारस की उम्र का सत्यापन करेगी।
उम्र सत्यापन की प्रक्रिया
- पारस के दावे के समर्थन में जन्म प्रमाण-पत्र, स्कूल रिकॉर्ड, आधार कार्ड आदि दस्तावेज मांगे जाएंगे।
- यदि जरूरी हुआ तो मेडिकल बोर्ड से ऑसिफिकेशन टेस्ट (हड्डी परीक्षण) करवाया जाएगा।
- रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट फैसला लेगा कि पारस को बाल न्याय बोर्ड में पेश किया जाए या सामान्य अदालत में।
यदि नाबालिग साबित हुआ तो उसे जेजे एक्ट (Juvenile Justice Act) के तहत बाल सुधार गृह में भेजा जाएगा।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
यह दावा सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
- कुछ लोग इसे आरोपी की चालाकी बता रहे हैं।
- वहीं कई लोग कह रहे हैं कि अगर सच में नाबालिग है तो कानून के अनुसार उसे सुरक्षा मिलनी चाहिए।
- महिला संगठनों और पीड़ित पक्ष ने कहा है कि उम्र का दावा जांच के बाद ही स्वीकार किया जाए।
पुलिस और प्रशासन का रुख
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी
यदि पारस नाबालिग साबित होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी,
लेकिन यदि दावा झूठा निकला तो आरोपी पर अतिरिक्त धाराएं लग सकती हैं।
मेरठ कपसाड़ कांड अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है।
पारस सोम का नाबालिग होने का दावा मामले को कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर जटिल बना रहा है।
आने वाले 10 दिनों में उम्र सत्यापन की रिपोर्ट से ही सच्चाई सामने आएगी।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में
तथ्यों और कानून का सख्ती से पालन होना बहुत जरूरी है।
