अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी ड्रामा देखने को मिला। दिसंबर 2025 में हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठजोड़ कर महायुति सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया। शिवसेना सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद अध्यक्ष पद हार गई। यह फैसला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर माना जा रहा है और भाजपा-शिवसेना संबंधों में दरार की आशंका बढ़ गई है।
चुनाव परिणाम: शिवसेना की सीटें ज्यादा, लेकिन सत्ता भाजपा के पास
अंबरनाथ नगर परिषद की कुल 45 सीटों के लिए 20 दिसंबर 2025 को मतदान हुआ और 21 दिसंबर को परिणाम घोषित किए गए। शिवसेना (शिंदे गुट) ने 23 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का तमगा हासिल किया। भाजपा को 16, कांग्रेस को 12 और एनसीपी (अजित पवार गुट) को 4 सीटें मिलीं।
अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल ने शिवसेना की मनीषा वालेकर को 6,000 से ज्यादा वोटों से हराया। उपाध्यक्ष पद भी भाजपा के खाते में गया। शिवसेना को सबसे ज्यादा सीटें मिलने के बावजूद सत्ता से बाहर होना एक बड़ा झटका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन कर रणनीतिक चाल चली।
भाजपा-कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन में भाजपा, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित) शामिल हैं। लेकिन अंबरनाथ चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग लड़ाई लड़ी। चुनाव के बाद भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाकर बहुमत जुटाया। इससे शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई।
भाजपा के इस कदम को शिंदे गुट के लिए करारा झटका माना जा रहा है। अंबरनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे के कल्याण लोकसभा क्षेत्र में आता है। यहां शिवसेना की हार से शिंदे की साख पर सवाल उठ रहे हैं। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने इसे स्थानीय मुद्दा बताया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे महायुति में दरार का संकेत कहा।
महाराष्ट्र सियासत पर असर: भाजपा-शिवसेना में तनाव की आशंका
यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है। भाजपा की यह रणनीति अन्य नगर परिषदों और आगामी बीएमसी चुनाव में भी दोहराई जा सकती है। शिंदे शिवसेना ने भाजपा पर विश्वासघात का आरोप लगाया है।
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि यह सवाल भाजपा से पूछा जाए,
क्योंकि गठबंधन केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर है।
कांग्रेस ने अपनी स्थिति मजबूत की है।
2015 में 8 सीटों से बढ़कर 12 सीटें जीतना पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है।
एनसीपी (शरद पवार) का प्रदर्शन कमजोर रहा, लेकिन अजित गुट ने महायुति में रहते हुए फायदा उठाया।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह गठबंधन महाराष्ट्र में विपक्षी एकता को बढ़ावा दे सकता है।
विकास कार्यों पर फोकस, लेकिन सियासी खेल जारी
अंबरनाथ में भाजपा ने विकास को मुद्दा बनाया। नई अध्यक्ष तेजश्री करंजुले ने शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर,
पानी और सड़क सुधार पर फोकस करने का वादा किया।
लेकिन सियासी खेल ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया।
शिवसेना ने आरोप लगाया कि भाजपा ने कांग्रेस से गठबंधन कर विकास को पीछे छोड़ दिया।
महाराष्ट्र राजनीति में नया अध्याय
अंबरनाथ चुनाव महाराष्ट्र की सियासत का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
भाजपा की यह चाल शिंदे शिवसेना को कमजोर कर सकती है और महायुति में तनाव बढ़ा सकती है।
आगामी चुनावों में यह गठबंधन मॉडल अन्य जगहों पर भी अपनाया जा सकता है।
जनता की नजर अब बीएमसी और अन्य नगर निकाय चुनावों पर है
