उम्र के अंतिम पड़ाव में भी किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उम्मीद की रोशनी छोड़ जाना मानवता की सबसे बड़ी मिसालों में से एक है। 100 वर्षीय डोनर के नेत्रदान से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां दान किए गए कॉर्निया और अन्य टिश्यू का इस्तेमाल गंभीर आंखों के संक्रमण से परेशान दो मरीजों के उपचार में किया गया। दोनों मरीजों की सर्जरी सफल रहने की जानकारी सामने आई है।
यह घटना न सिर्फ चिकित्सा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक बड़ा संदेश है जो मानते हैं कि अधिक उम्र में नेत्रदान का कोई लाभ नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, कॉर्निया की उपयोगिता केवल डोनर की उम्र देखकर तय नहीं की जाती, बल्कि टिश्यू की गुणवत्ता और मेडिकल जांच इसके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
100 साल की उम्र में भी किया गया कॉर्निया का उपयोग
आमतौर पर समाज में यह धारणा देखने को मिलती है कि बुजुर्ग व्यक्ति की आंखें या अंग दान करने योग्य नहीं होते। हालांकि, चिकित्सा प्रक्रिया में ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है कि अधिक उम्र का हर डोनर स्वतः अनुपयुक्त माना जाए।
डोनर से प्राप्त कॉर्नियल टिश्यू को कई आवश्यक जांचों से गुजरना पड़ता है। यदि उसकी गुणवत्ता चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप पाई जाती है, तो विशेषज्ञ जरूरतमंद मरीजों के उपचार में उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
यही वजह है कि 100 वर्षीय डोनर से प्राप्त टिश्यू का उपयोग दो मरीजों की आंखों की सर्जरी में किया जाना नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
गंभीर आंखों के संक्रमण से परेशान थे दोनों मरीज
बताया गया है कि जिन दो मरीजों का उपचार किया गया, वे आंखों के गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे। संक्रमण के कारण उनकी आंखों की स्थिति चिंताजनक थी और उपचार के लिए सर्जिकल हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी।
उपयुक्त डोनर टिश्यू उपलब्ध होने के बाद चिकित्सकों ने आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद दोनों मरीजों की आंखों की सर्जरी की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों ऑपरेशन सफल रहे और मरीजों के लिए आगे बेहतर स्थिति की उम्मीद बनी है।
एक डोनर से दो मरीजों को मिल सकती है मदद
कॉर्निया आंख की बाहरी पारदर्शी परत होती है। यह प्रकाश को आंख के अंदर पहुंचाने और साफ दृष्टि के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी बीमारी, संक्रमण या चोट के कारण कॉर्निया को गंभीर नुकसान पहुंचने पर कुछ मामलों में प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ सकती है।
नेत्रदान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डोनर से प्राप्त कॉर्नियल टिश्यू का उपयोग जरूरत के अनुसार एक से अधिक मरीजों के उपचार में किया जा सकता है। इसलिए एक व्यक्ति का नेत्रदान कई लोगों के लिए उम्मीद का माध्यम बन सकता है।
क्या ज्यादा उम्र में नेत्रदान संभव है?
यह सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि क्या 70, 80 या 100 वर्ष की उम्र में नेत्रदान किया जा सकता है। इसका जवाब पूरी तरह मेडिकल जांच पर निर्भर करता है।
डोनर की उम्र एक कारक जरूर है, लेकिन यह अकेला निर्णायक मानक नहीं है। कॉर्निया की स्थिति, टिश्यू की गुणवत्ता और अन्य चिकित्सकीय जांचों के आधार पर विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि उसे प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं।
इसलिए किसी बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु के बाद केवल उम्र के आधार पर नेत्रदान की
संभावना को खारिज नहीं करना चाहिए। अंतिम निर्णय संबंधित
चिकित्सा विशेषज्ञ और आई बैंक की जांच प्रक्रिया के आधार पर होता है।
कॉर्निया की गुणवत्ता क्यों होती है महत्वपूर्ण?
कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए सिर्फ टिश्यू उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। उसकी चिकित्सकीय
गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञ कई मानकों की जांच के बाद यह निर्धारित करते हैं कि
डोनर कॉर्निया किसी मरीज के उपचार के लिए उपयुक्त है या नहीं।
विशेष रूप से कॉर्निया की कोशिकाओं की स्थिति और
टिश्यू की संरचना जैसी चीजों का मूल्यांकन किया जाता है।
इसी कारण हर उम्रदराज डोनर का कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
दूसरी ओर, यदि जांच में टिश्यू बेहतर गुणवत्ता का पाया जाता है, तो
उम्र अधिक होने के बावजूद उसका उपयोग संभव हो सकता है।
नेत्रदान को लेकर दूर करनी होंगी भ्रांतियां
भारत सहित कई देशों में नेत्रदान को लेकर लोगों के बीच अब भी कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि वृद्ध व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते,
जबकि कुछ लोग यह समझते हैं कि नेत्रदान का अर्थ पूरी आंख का प्रत्यारोपण करना होता है।
वास्तव में कॉर्निया से संबंधित प्रत्यारोपण में जरूरत के अनुसार डोनर के कॉर्नियल टिश्यू का इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए नेत्रदान के बारे में सही जानकारी समाज तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
100 वर्षीय डोनर ने दिया मानवता का बड़ा संदेश
इस पूरे मामले की सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि 100 वर्ष की उम्र में भी डोनर का फैसला
किसी दूसरे व्यक्ति के उपचार में उपयोगी साबित हुआ।
यह उदाहरण बताता है कि किसी व्यक्ति के जाने के बाद भी
उसका योगदान दूसरे लोगों के जीवन में उम्मीद कायम रख सकता है।
दो मरीजों के उपचार में डोनर टिश्यू का इस्तेमाल होना परिवार के लिए भी
संतोष का विषय हो सकता है और समाज के लिए प्रेरणा का संदेश देता है।
नेत्रदान के प्रति बढ़ानी होगी जागरूकता
विशेषज्ञों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
लोगों को यह समझने की आवश्यकता है कि डोनर की उम्र देखकर स्वयं
यह निर्णय नहीं लेना चाहिए कि टिश्यू उपयोगी होगा या नहीं।
चिकित्सकीय टीम द्वारा जांच के बाद ही इसकी वास्तविक उपयोगिता निर्धारित की जाती है।
ऐसे में परिवारों को नेत्रदान से जुड़ी सही जानकारी हासिल करनी चाहिए और
उपलब्ध वैधानिक एवं चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
दो मरीजों के लिए नई उम्मीद बना यह नेत्रदान
100 वर्षीय डोनर से प्राप्त कॉर्निया और टिश्यू का दो मरीजों की आंखों के उपचार में
इस्तेमाल होना एक भावनात्मक और चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण उदाहरण है।
इससे यह संदेश मिलता है कि नेत्रदान की उम्र सीमा को लेकर बनी
धारणाओं के बजाय वैज्ञानिक जांच और विशेषज्ञों की राय पर भरोसा करना चाहिए।
किसी व्यक्ति का नेत्रदान किसी दूसरे इंसान के लिए दृष्टि बचाने या जीवन को बेहतर बनाने की
दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। 100 वर्षीय डोनर की यह मिसाल समाज को मानवता, दान और
चिकित्सा विज्ञान के बीच बने इस अनमोल संबंध को समझने का अवसर देती है।
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