राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर। विकासखंड बेलघाट के गौरगंज से मुकारिमपुर जाने वाला करीब चार किलोमीटर लंबा मार्ग इन दिनों क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बना हुआ है। सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 50 मीटर के एक हिस्से में सड़क कम और गड्ढे अधिक नजर आते हैं। बारिश होने पर इन गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।
यह मार्ग आसपास के 15 से 20 गांवों के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। गौरगंज, मुकारिमपुर, नरायनपुर समेत आसपास के गांवों के ग्रामीण इसी रास्ते से बेलघाट थाना, विकासखंड कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), बैंक और बाजार तक पहुंचते हैं। ऐसे में सड़क खराब होने का सीधा असर रोजमर्रा के आवागमन पर पड़ रहा है।
गहरे गड्ढों में तब्दील हुआ सड़क का बड़ा हिस्सा
गौरगंज-मुकारिमपुर मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क की सतह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गड्ढे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता विशेष रूप से जोखिम भरा हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार दोपहिया वाहन गड्ढों में फंसने से चालक असंतुलित होकर गिर जाते हैं। इससे चोट लगने का खतरा बना रहता है। वहीं, सड़क की खराब स्थिति के कारण ई-रिक्शा और ऑटो चालकों को भी परेशानी होती है। कुछ चालक इस मार्ग पर जाने से बचते हैं, जिसके चलते ग्रामीणों को दूसरे साधनों के लिए अधिक किराया देना पड़ता है।
15 से 20 गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित
गौरगंज-मुकारिमपुर मार्ग स्थानीय लोगों के लिए महज एक सड़क नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों को मुख्य सुविधाओं से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ग्रामीणों को सरकारी कार्यालयों, अस्पताल, बैंक और बाजार तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है।
सड़क की बदहाल स्थिति का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, किसानों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जरूरी काम के लिए घर से निकलना मजबूरी है, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़क के कारण सफर जोखिम भरा हो गया है।
निर्माण के करीब एक साल बाद ही सड़क की हालत खराब होने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि इस सड़क का निर्माण पिछले वर्ष ही कराया गया था। इसके बावजूद महज एक साल के भीतर सड़क कई जगह से टूट गई और गड्ढों में तब्दील होने लगी। इससे स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
हालांकि, सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर लगाए गए आरोपों की संबंधित विभाग की ओर से पुष्टि किया जाना बाकी है। ग्रामीणों की मांग है कि
सड़क की तकनीकी जांच कराकर निर्माण की गुणवत्ता की स्थिति स्पष्ट की जाए।
बारिश में सड़क बन जाती है जलभराव का केंद्र
बरसात के मौसम में गौरगंज-मुकारिमपुर मार्ग की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
सड़क पर बने गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से राहगीरों को यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि
सड़क का सुरक्षित हिस्सा कहां है और गड्ढा कहां।
जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी
काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को
सीएचसी तक ले जाने में परिजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क के साथ जल निकासी की समुचित व्यवस्था होती तो
बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
सड़क किनारे नाली और जल निकासी की मांग
स्थानीय लोगों ने सड़क की मरम्मत के साथ-साथ
जल निकासी की स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सिर्फ गड्ढों को भर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
बारिश के पानी की निकासी के लिए सड़क के किनारे नाली का निर्माण भी जरूरी है।
ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर सड़क की वर्तमान
स्थिति का आकलन करे और जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए।
ग्रामीणों ने दी धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
लगातार बनी सड़क समस्या से नाराज ग्रामीणों ने अब आंदोलन की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों, जिलाधिकारी गोरखपुर और लोक
निर्माण विभाग से मांग की है कि गौरगंज-मुकारिमपुर मार्ग की जल्द मरम्मत कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क को दुरुस्त नहीं कराया गया और
जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो वे धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- गौरगंज-मुकारिमपुर मार्ग की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
- सड़क की निर्माण गुणवत्ता की जांच कराई जाए।
- बड़े गड्ढों को जल्द भरा जाए।
- बरसात के पानी की निकासी के लिए नाली बनाई जाए।
- संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर निरीक्षण करें।
- 15 से 20 गांवों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए स्थायी समाधान किया जाए।
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