बाढ़, अग्निकांड या अन्य प्राकृतिक आपदाओं में गरीब परिवारों के आशियाने पूरी तरह नष्ट होने की स्थिति में प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। निर्देश दिया गया है कि ऐसे पात्र परिवारों को नियमों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए। जिन जरूरतमंद परिवारों के पास आवास निर्माण के लिए भूमि नहीं है, उन्हें पात्रता के अनुसार भूमि का पट्टा उपलब्ध कराने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि आपदा की वजह से जिन गरीब परिवारों का घर पूरी तरह नष्ट हो गया है, उन्हें लंबे समय तक खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर न होना पड़े। संबंधित अधिकारियों को पात्र परिवारों की पहचान कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने पर प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
बाढ़ और अग्निकांड से प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता
बरसात के मौसम में बाढ़ और जलभराव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई गरीब परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इसी तरह आग लगने की घटनाओं में भी गरीब परिवारों का वर्षों की मेहनत से बनाया गया आशियाना कुछ ही समय में राख हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो जाता है।
इसी को देखते हुए आपदा प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ-साथ उनके स्थायी पुनर्वास पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। पात्रता पूरी करने वाले परिवारों को सरकारी आवास योजना से जोड़कर स्थायी आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने पर जोर है।
प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना से मिलेगा लाभ
घर पूरी तरह नष्ट होने वाले पात्र गरीब परिवारों को उनकी पात्रता के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य आपदा के बाद प्रभावित परिवारों को दोबारा सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि पात्र लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। वास्तविक रूप से प्रभावित परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि आपदा के कारण बेघर हुए लोगों को जल्द से जल्द स्थायी राहत मिल सके।
जमीन नहीं होने पर भूमि पट्टा उपलब्ध कराने पर भी जोर
कई गरीब परिवार ऐसे होते हैं जिनका घर तो आपदा में नष्ट हो जाता है, लेकिन उनके पास दोबारा मकान बनाने के लिए अपनी जमीन नहीं होती। ऐसे मामलों में पात्रता के अनुसार भूमि का पट्टा उपलब्ध कराने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
भूमि उपलब्ध होने के बाद पात्र परिवार को आवास योजना का लाभ दिलाकर स्थायी घर बनाने की दिशा में कार्रवाई की जा सकती है। इससे आपदा प्रभावित परिवारों को केवल तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सुरक्षित आवास भी मिल सकेगा।
प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ी
आपदा के बाद राहत सामग्री, अस्थायी आश्रय और अन्य जरूरी सहायता के साथ प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होती है। ऐसे में संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
निर्देश का मुख्य उद्देश्य यही है कि बाढ़ या अग्निकांड में पूरी तरह घर गंवाने वाले गरीब परिवारों को पात्रता के अनुसार आवास और भूमि उपलब्ध कराकर उन्हें फिर से सुरक्षित जीवन की शुरुआत करने का अवसर दिया जाए।
