राकेश शर्मा की रिपोर्ट
विद्यालय परिसर में हुआ हरिशंकरी वृक्षारोपण, ग्रामीणों ने लिया पेड़ों की देखभाल का संकल्प
गोरखपुर। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने की दिशा में बुधवार को धुरियापार स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान पीपल, पाकड़ और बरगद के पौधों को त्रिकोणाकार स्वरूप में रोपित किया गया। इस पहल का उद्देश्य विद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने के साथ बच्चों को स्वच्छ एवं प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
वृक्षारोपण कार्यक्रम का नेतृत्व पूर्व प्रधान प्रतिनिधि रिंटू शाही ने किया। उनके नेतृत्व में विद्यालय परिसर में हरिशंकरी के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प लिया।
ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कार्यक्रम में बंशीधर निषाद, रामपाल, हिसाबुल खान, हरेंद्र गुप्ता, हरिहर प्रसाद और साहब कुमार समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने पौधारोपण में सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
ग्रामीणों का कहना था कि विद्यालय जैसे सार्वजनिक स्थान पर बड़े और छायादार वृक्षों का रोपण बच्चों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए भी उपयोगी रहेगा। इससे परिसर में हरियाली बढ़ेगी और आने वाले समय में वातावरण को अधिक स्वच्छ एवं सुखद बनाने में मदद मिलेगी।
पीपल, पाकड़ और बरगद का त्रिवेणी संगम
इस अवसर पर रिंटू शाही ने कहा कि पीपल, पाकड़ और बरगद का त्रिवेणी संगम पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इन वृक्षों के विकसित होने के बाद विद्यालय परिसर में प्राकृतिक छाया उपलब्ध होगी और बच्चों को बेहतर वातावरण मिलेगा। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने में सभी लोग सहयोग करें, ताकि आने वाले वर्षों में ये पौधे बड़े होकर विद्यालय और गांव की हरियाली का आधार बन सकें।
बच्चों को मिलेगा प्राकृतिक वातावरण
विद्यालय परिसर में हरिशंकरी वृक्षारोपण होने से विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब रहने और पर्यावरण संरक्षण को समझने का अवसर भी मिलेगा। पेड़ों के बढ़ने के साथ परिसर में छाया और हरियाली बढ़ेगी, जिससे विद्यालय का वातावरण अधिक अनुकूल हो सकेगा।
ग्रामीणों ने रिंटू शाही की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गांवों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि सामूहिक प्रयासों से गांवों में हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरण संतुलन को मजबूत किया जा सकता है।