उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आवंटित करोड़ों रुपये उपयोग नहीं हो पा रहे हैं। यह खुलासा होने के बाद शासन ने सभी जिलों के जिला पंचायती राज अधिकारियों (DPRO) को बड़ा आदेश जारी किया है। आदेश में पंचायतों में पड़े फंड को तुरंत खर्च करने और विकास कार्यों को गति देने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में है। कई पंचायतों में फंड लंबे समय से पड़े हैं, जिससे गांवों का विकास रुका हुआ है।
शासन ने DPRO को जिम्मेदार ठहराया है और रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश पंचायत चुनाव से पहले विकास कार्यों को तेज करने की रणनीति का हिस्सा लग रहा है। ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य कार्यों के लिए फंड आवंटित होते हैं, लेकिन उपयोग न होने से जनता परेशान है।
अब सख्ती से फंड खर्च होंगे और कार्य पूरे होंगे। यह फैसला गांवों के विकास को गति देगा। इस ब्लॉग में हम फंड पड़े होने की पूरी डिटेल्स, शासन के आदेश, कारण, प्रभाव और पंचायत विकास पर असर बताएंगे। यदि आप ग्राम पंचायत से जुड़े हैं, तो यह अपडेट आपके लिए जरूरी है।
फंड की स्थिति: करोड़ों रुपये पड़े हैं
यूपी की पंचायतों में विकास फंड की स्थिति चिंताजनक है। मुख्य बातें:
- कुल करोड़ों रुपये उपयोग नहीं।
- कई पंचायतों में फंड लंबित।
- सड़क, नाली, लाइट जैसे कार्य रुके।
- केंद्र और राज्य योजना का फंड।
- रिपोर्ट में खुलासा।
यह फंड गांवों के विकास के लिए आवंटित था।
शासन का आदेश: DPRO को सख्त निर्देश
शासन ने सभी DPRO को आदेश जारी किया:
- फंड तुरंत खर्च करें।
- विकास कार्यों को गति दें।
- रिपोर्ट सबमिट करें।
- लापरवाही पर कार्रवाई।
- मॉनिटरिंग बढ़ाई।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है।
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फंड उपयोग में देरी
फंड पड़े रहने के मुख्य कारण:
- पंचायतों में विवाद।
- टेंडर प्रक्रिया में देरी।
- अधिकारियों की लापरवाही।
- तकनीकी समस्या।
- जागरूकता की कमी।
यह देरी विकास को रोक रही है।
प्रभाव: गांवों का विकास रुका
फंड न खर्च होने से:
- गांवों में सुविधाएं नहीं।
- सड़कें खराब।
- नाली और लाइट की समस्या।
- जनता परेशान।
- पंचायतों की छवि खराब।
लोग कहते हैं, “फंड पड़े हैं, काम नहीं हो रहे।