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हिरासत या गिरफ्तारी पर सीएम और मंत्रियों की जाएगी कुर्सी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। गंभीर आपराधिक मामलों में हिरासत में लिए जाने या गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रियों को अपना पद छोड़ना होगा। सरकार गुरुवार को लोकसभा में शासन और प्रशासन (संसोधन) विधेयक पेश करेगी। इसमें प्रावधान है कि किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री को अगर गंभीर अपराध के आरोप में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है तो उन्हें 30 दिन के भीतर पद छोड़ना होगा। पद नहीं छोड़ने पर राष्ट्रपति की सलाह से ऐसे मंत्रियों को हटा दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार इस विधेयक के लागू होने के बाद मंत्रीगण अपनी कुर्सी बचाने के लिए कोर्ट से राहत की कोशिश करेंगे।
गृह मंत्री अमित शाह इसके लिए गुरुवार को तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेंगे। विधेयक में यह आशंका जताई गई है कि संसद में हंगामा हो सकता है।
विधेयक का प्रावधान
शासन (संसोधन) अधिनियम की धारा 45 में एक उपधारा जोड़ी गई है। इसके मुताबिक, कोई मंत्री, चाहे वह केंद्रीय स्तर का हो या राज्य स्तर का, गंभीर अपराध के आरोप में 30 दिन तक हिरासत में रखा जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे पद से हटना पड़ेगा।
गिरफ्तारी के 30 दिन में देना होगा इस्तीफा, गृह मंत्री शाह आज पेश करेंगे विधेयक
संसदीय अपराध जिनमें पांच वर्ष तक कैद की सजा प्रावधान है, उनमें गिरफ्तारी या हिरासत की स्थिति में मंत्री या मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना होगा। इस स्थिति में राष्ट्रपति की सलाह से मंत्री या मुख्यमंत्री को पद से हटाया जा सकेगा। यदि 30 दिन की अवधि समाप्त हो जाती है और इस्तीफा नहीं दिया जाता है, तो राष्ट्रपति उसे हटा देंगे।
जमानत या रिहाई के बाद कोई बाध्यता नहीं
विधेयक में प्रावधान है कि संगीन मामलों में हिरासत या गिरफ्तारी के बाद जमानत मिलने या रिहा होने की स्थिति में मंत्री या मुख्यमंत्री को पद ग्रहण करने पर कोई बाध्यता नहीं होगी।
जरूरत क्यों
विधेयक लाने संबंधी जरूरत पर सरकार का कहना है कि मंत्रियों की गिरफ्तारी स्थिति में नैतिकता का सवाल खड़ा हो सकता है। विधेयक से शासन में पारदर्शिता आएगी और लोकतंत्र की मर्यादा भी बनी रहेगी।
केजरीवाल की गिरफ्तारी से उठे थे सवाल
इस विधेयक पर काम की शुरुआत तब हुई थी, जब शराब घोटाले में गिरफ्तार सीएम अरविंद केजरीवाल को लेकर सवाल उठे थे। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार से यह सवाल पूछ रहा था कि जेल में रहते हुए कोई मुख्यमंत्री कैसे सरकार चला सकता है। इस मुद्दे पर सरकार ने गंभीरता से विचार किया और अब इस विधेयक को लाने का फैसला किया गया