इस खबर में एनटीएफ यानी नारकोटिक्स टास्क फोर्स प्रयागराज ने गोरखपुर के बेलघाट बॉर्डर और अंडरपुल के पास दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों तस्कर भारी मात्रा में, यानी एक क्विंटल गांजा के साथ पकड़े गए हैं। इनमें से एक बिहार के सीवान जिले का निवासी है, जबकि दूसरा आरोपी भी इसी गिरोह से जुड़ा हुआ है। टीम को सूचना मिली थी कि सीमा पर गांजा लाने वाले गिरोह की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं, जिसके बाद टीम ने योजना बनाकर आरोपियों को पकड़ा। इनके पास से एक कार, दो मोबाइल फोन और 1350 रुपए नकद भी बरामद किए गए हैं।
एनटीएफ की कार्रवाई का विस्तृत विवरण
इस कार्रवाई को एनटीएफ के प्रभारी एसोसिएट मनीष कुमार श्रीवास्तव एवं उनकी टीम ने अंजाम दिया। रविवार शाम करीब पांच बजे के आसपास टीम ने दोनों आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ़्तार किया। पूछताछ में इन तस्करों ने माना कि वे लंबे समय से इस अवैध धंधे में लिप्त हैं और अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का हिस्सा हैं। पकड़े गए दोनों तस्करों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज़ कर उनकी गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है।
तस्कर गिरोह का नेटवर्क और modus operandi
एनटीएफ को कई दिनों से यह सूचना मिल रही थी कि गोरखपुर बेलघाट बॉर्डर से बिहार, उत्तर प्रदेश और आसपास के ज़िलों में गांजा की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। यह गिरोह सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों को छुपाने के लिए अलग-अलग वाहनों और मोबाइल सिम कार्ड का उपयोग करता है। इनके तौर-तरीकों से यह साफ ज़ाहिर होता है कि इनका नेटवर्क काफी गहरा और संगठित है। पड़ोसी राज्य बिहार के सिवान जिले निवासी मनीष सिंह इस नेटवर्क का मुख्य संचालक है।
कानूनी कार्रवाई और बरामदगी
पुलिस और एनटीएफ टीम ने पूछताछ के दौरान जब इनके पास मिले मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की तो इससे कई अहम जानकारियाँ सामने आई हैं। 102 किलो गांजा बरामद किया गया, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपयों में है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी से प्रदेश और आसपास के राज्यों में चल रहे इस तरह के कई गिरोहों का खुलासा हो सकता है और इस विराट नेटवर्क के अन्य सदस्य भी जल्द पुलिस की गिरफ्त में आ सकते हैं।
सामाजिक व आर्थिक असर
गांजा तस्करी का यह धंधा समाज और युवाओं के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। एनटीएफ की ओर से की गई यह कार्रवाई समाज में नशे के पदार्थों के खिलाफ कड़ा संदेश देती है। गांजे के साथ पकड़े जाने वाले आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जिससे अवैध तस्करी के धंधे को रोका जा सके। प्रशासन का मानना है कि इस बड़े गिरोह के टूटने से क्षेत्र में नशे के कारोबार पर करारा प्रहार होगा।
अन्य अहम बिंदु
- आरोपियों के कब्जे से 1350 रुपए नकद भी मिले हैं, जो तस्करी के कारोबार से जुड़े पैसे हैं।
- दोनों आरोपियों के पास दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इससे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिलेगी।
- बिहार के सिवान जिले के मनीष सिंह और गोरखपुर के स्थानीय निवासी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि ये लोग कई बार गांजे की तस्करी कर चुके हैं और उनका नेटवर्क बिहार, यूपी और आसपास के कई जिलों में फैला हुआ है।
कार्रवाई का महत्व
यह कार्रवाई दिखाती है कि एनटीएफ व पुलिस ऐसे अवैध धंधों के प्रति पूरी तरह सतर्क है और सीमावर्ती जिलों में बढ़ती तस्करी को रोकने के लिए हर संभव कार्रवाई की जा रही है। इससे समाज में यह संदेश गया कि पुलिस अवैध तस्करी के खिलाफ पूरी ताकत के साथ खड़ी है और दोषियों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा।
इस प्रकार, यह खबर समाज में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम में एक और बड़ी सफलता के रूप में देखी जा सकती है, जिससे गांजा तस्करी करने वाले गिरोह को तगड़ा झटका लगा है।