जनगणना 2027: उत्तर प्रदेश में 6 लाख कर्मियों की तैनाती, दूसरे चरण में होगी जातीय गणना
मेटा डिस्क्रिप्शन: उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज, मई-जून 2026 से शुरू होगा पहला चरण। 6 लाख कर्मी घर-घर डेटा इकट्ठा करेंगे, दूसरे चरण में जातीय गणना। जानें पूरी डिटेल और महत्व।
भारत की 16वीं जनगणना 2027 अब तेजी से हकीकत का रूप ले रही है। कोविड महामारी के कारण स्थगित हुई यह गणना अब दो चरणों में पूरी होगी, जिसमें पहली बार स्वतंत्रता के बाद पूर्ण जातीय गणना शामिल है। देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि जनगणना के लिए करीब 6 लाख कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो घर-घर जाकर डेटा संग्रह करेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी, मोबाइल ऐप और सॉफ्टवेयर के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
जनगणना 2027 की तैयारी उत्तर प्रदेश में तेज
उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर काम शुरू हो गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की बैठक में विस्तृत योजना पर चर्चा हुई। जनगणना निदेशक शीतल वर्मा ने प्रस्तुति दी, जिसमें प्रदेश की विशाल जनसंख्या (लगभग 25 करोड़) को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित तैयारी पर जोर दिया गया।
इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी। कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें सॉफ्टवेयर हैंडलिंग, मोबाइल ऐप आधारित डाटा एंट्री और रिपोर्टिंग शामिल है। अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत किया जा रहा है ताकि कोई कमी न रहे।
दो चरणों में होगी जनगणना
जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा:
- पहला चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग गणना – HLO): उत्तर प्रदेश में यह चरण मई-जून 2026 में शुरू होगा। इसमें हर मकान, भवन, संस्थान और परिवार का विवरण दर्ज किया जाएगा। घरों की संख्या, सुविधाएं (पानी, बिजली, शौचालय आदि) और आवासीय स्थिति की जानकारी इकट्ठी की जाएगी। इस चरण में ही करीब 6 लाख कार्मिक तैनात किए जाएंगे, जिनमें 5 लाख प्रगणक (एनुमरेटर), 84 हजार सुपरवाइजर और 12 हजार अधिकारी शामिल होंगे।
- दूसरा चरण (जनसंख्या गणना और जातीय गणना): यह चरण फरवरी 2027 में होगा (राष्ट्रीय स्तर पर संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027)। इसमें हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी –
- उम्र, लिंग, शिक्षा, रोजगार, धर्म आदि के साथ-साथ जाति का विवरण भी दर्ज किया जाएगा।
- यह स्वतंत्र भारत में पहली पूर्ण जातीय गणना होगी, जो 1931 के बाद हो रही है।
जातीय गणना का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील है। इससे सामाजिक-आर्थिक स्थिति,
आरक्षण नीतियां और कल्याणकारी योजनाओं का बेहतर निर्धारण हो सकेगा।
सरकार इसे निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से कराने पर जोर दे रही है।
महत्वपूर्ण निर्देश और फ्रीज
जनगणना की सटीकता के लिए केंद्र सरकार के निर्देशानुसार,
31 दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार सभी प्रशासनिक इकाइयां (जिले, तहसील, ब्लॉक, नगर आदि) फ्रीज रहेंगी।
1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक किसी भी इकाई में क्षेत्रीय बदलाव नहीं किया जाएगा।
इससे गणना में कोई असंगति नहीं आएगी।
जातीय गणना का महत्व
जातीय गणना से ओबीसी, एससी-एसटी और अन्य वर्गों की सटीक संख्या सामने आएगी। इससे सामाजिक न्याय
, आरक्षण और विकास योजनाओं में सटीकता आएगी। राजनीतिक दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है,
क्योंकि इससे लोकसभा सीटों का परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रभावित होगा।
