गोरखपुर शहर में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाला गंभीर मामला सामने आया है। शहर में बड़ी संख्या में अनफिट और अवैध एंबुलेंसें धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। यही नहीं, इनमें से कई एंबुलेंसों पर फर्जी नंबर प्लेट भी लगी पाई गई हैं। मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के नाम पर खुलेआम मरीज माफिया सक्रिय हैं, जो बिना किसी जांच और स्वास्थ्य मानकों का पालन किए सीधे मरीजों को उठा रहे हैं।
शिकायत के बाद खुला राज
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एसएसपी सिटी अभिनव त्यागी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर अभियान चलाया। इस दौरान कई एंबुलेंस पकड़ी गईं, जिनमें से चार वाहनों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस द्वारा जब गाड़ियों की फिटनेस और पंजीकरण की जानकारी मांगी गई तो उनके पास कोई दस्तावेज नहीं मिला।
200 से ज्यादा अनफिट एंबुलेंसें दौड़ रहीं सड़कों पर
आरटीओ के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में कुल 548 एंबुलेंसें पंजीकृत हैं, लेकिन जांच में पाया गया कि इनमें से करीब 200 एंबुलेंस अनफिट हैं। यह सभी एंबुलेंसें मरीजों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। इनमें न तो जरूरी उपकरण हैं और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी सुविधाएं। आपात स्थिति में इन एंबुलेंसों पर मरीजों की जान पूरी तरह से भगवान भरोसे रहती है।
मरीजों की जान पर भारी लापरवाही
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पकड़ी गई कई एंबुलेंसें न तो फिटनेस टेस्ट पास कर पाई हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग से उन्हें अनुमति मिली है। इसके बावजूद वे लंबे समय से धड़ल्ले से मरीजों को ढो रही थीं। खासकर गंभीर हालात में इन एंबुलेंसों का उपयोग किया जा रहा था, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही थी।
स्वास्थ्य विभाग को लिखी चिट्ठी
पुलिस ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि तीन बड़े अस्पतालों से जुड़ी एंबुलेंसें अनफिट पाई गई हैं। ऐसे में इनकी भी जांच जरूरी है। विभागीय अधिकारी इस मामले में कार्रवाई करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी अस्पताल प्रबंधन और एंबुलेंस संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मरीज़ माफिया का खेल
मरीज माफिया कथित तौर पर पुराने वाहनों को मामूली सजावट कर एंबुलेंस बना देते हैं। उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर उसे शहर में दौड़ाते हैं। जब मरीज या उनके परिजन किसी आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस बुलाते हैं, तो उन्हें यह देखकर धोखा हो जाता है कि गाड़ी सामान्य एंबुलेंस जैसी दिख रही है। लेकिन इनमें न तो स्वास्थ्य मानकों का पालन होता है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद होता है।
👉 निष्कर्ष:
यह मामला गोरखपुर शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। मरीजों की जिंदगी से इस तरह का खिलवाड़ न केवल गैरकानूनी है, बल्कि अमानवीय भी है। अब देखना होगा कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद कितनी सख्त कार्रवाई होती है और मरीजों की जान बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।