🎯 ऑनलाइन गेमिंग व बेटिंग के नाम पर 146 करोड़ की ठगी का बड़ा खुलासा, दो शातिर गिरफ्तार
लखनऊ/बलरामपुर।
उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराध का पर्दाफाश किया है। ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के नाम पर आम जनता से अरबों रुपये ठगने वाले दो अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। यह दोनों आरोपी लंबे समय से लोगों को झांसा देकर और बैंक खातों का इस्तेमाल करके काले धन को सफेद बना रहे थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि केवल दो व्यक्तियों ने ही 228 बैंक खातों के माध्यम से 146 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन कर डाला।
📌 गिरफ्तारी कहाँ और कैसे हुई?
बलरामपुर पुलिस की साइबर सेल ने रविवार को राजधानी लखनऊ से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस को लंबे समय से इनकी गतिविधियों पर नजर थी। साइबर ठगी का जाल इतना बड़ा था कि कई राज्यों तक फैला हुआ प्रतीत हो रहा है। फिलहाल पुलिस ने दोनों को लखनऊ के इंदिरानगर इलाके से पकड़ा, जहां ये किराए पर मकान लेकर रह रहे थे और वहीं से ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।
📌 आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
- अबुल आस उर्फ अबुलास – निवासी इटवा, ज़िला सिद्धार्थनगर।
- विनीत मिश्रा – निवासी मीठौली बाजार, ज़िला सुल्तानपुर।
दोनों शातिर दिमाग से ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग एप्लिकेशन के नाम पर लोगों से पैसे जमा करवाते थे और फिर अपने नेटवर्क में मौजूद कई बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवा देते थे।
📌 कितने पैसों का हुआ लेन-देन?
पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
अबुल आस के नाम से जुड़े 56 बैंक खातों में 22.95 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है।
वहीं, विनीत मिश्रा के नाम से जुड़े 30 बैंक खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का लेन-देन हुआ है।
दोनों मिलकर कुल 228 बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे थे।
शुरुआती जांच में अब तक 146 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की पुष्टि हो चुकी है।
यह आंकड़े बताते हैं कि दोनों आरोपी कितने बड़े पैमाने पर आम लोगों को चूना लगा रहे थे।
📌 पुलिस की कार्रवाई और जांच
बलरामपुर के एसपी विकास कुमार ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों अपराधी लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के नाम पर ठगी कर रहे थे। इनका नेटवर्क बहुत बड़ा है और कई राज्यों में इसके तार जुड़ सकते हैं। पुलिस अब इन खातों और ट्रांजेक्शन्स की गहनता से जांच कर रही है।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि इस काले कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बैंकिंग चैनल, पेमेंट गेटवे और फर्जी कंपनियों की भी भूमिका सामने आ सकती है।
📌 ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ठगी कैसे होती है?
ऑनलाइन ठग सबसे पहले लोगों को बेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर आकर्षित करते हैं। “कम निवेश में बड़ा मुनाफा” और “गेम खेलकर पैसे कमाओ” जैसे विज्ञापनों से लोग आसानी से फंस जाते हैं।
लोगों से कहा जाता है कि वो पहले कुछ पैसे जमा करें।
शुरुआती दिनों में छोटी-मोटी रकम वापस भी कर दी जाती है ताकि लोगों का भरोसा बने।
इसके बाद जब बड़ी रकम लगाई जाती है, तो वह पूरी तरह डूब जाती है।
ठग पैसे को कई फर्जी खातों में घुमाकर गायब कर देते हैं, जिससे पीड़ित व्यक्ति कहीं शिकायत करने तक में हिचकिचाता है।
📌 आम जनता के लिए सबक
यह घटना सिर्फ एक केस नहीं है बल्कि साइबर अपराधियों की बढ़ती ताकत और लोगों की लापरवाही का सबूत है।
- किसी भी ऑनलाइन बेटिंग या गेमिंग प्लेटफॉर्म पर पैसे लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच करें।
- RBI और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त चैनल के अलावा किसी भी लिंक या एप पर पैसे ट्रांसफर न करें।
- किसी भी अजनबी द्वारा भेजे गए लिंक, ऑफर या QR कोड से सावधान रहें।
- साइबर क्राइम से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।
📌 पुलिस का सख्त संदेश
बलरामपुर पुलिस ने साफ किया है कि इस तरह की ठगी करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई होगी और उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट तक लगाया जा सकता है।
📢 फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ की अपील
समाज के हर वर्ग को इस तरह के ऑनलाइन जाल से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को “जल्दी पैसे कमाने” के लालच से बचना होगा।
सरकार और प्रशासन की भी यह जिम्मेदारी है कि वे समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर आम लोगों को साइबर अपराध से सुरक्षित रखें।