फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज रिपोर्ट
देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। अनुमान है कि स्लैब घटने से वित्तीय वर्ष 2023-24 में 48,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। हालांकि, लाजरी व तंबाकू जैसे उत्पादों पर 40 प्रतिशत टैक्स से 43,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी। इसका मतलब है कि शुद्ध घाटा केवल 5,000 करोड़ रुपये ही रहेगा।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, अल्पकालिक दबावों के बावजूद राज्यों को शुद्ध लाभ मिलेगा। राज्यों को जीएसटी में कम से कम 10 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके अलावा, हस्तांतरण के जरिए भी 4.1 लाख करोड़ रुपये की राशि राज्यों को दी जाएगी। इस तरह कुल मिलाकर राज्यों को 14.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे आठ विपक्षी शासित राज्यों को 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये तक का संभावित नुकसान हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2017 में औसत जीएसटी दर 14.4 प्रतिशत थी, जो 2019 में घटकर 11.6 प्रतिशत रह गई। अब इसके और घटकर 9.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। शुरुआती दौर में राजस्व में गिरावट देखी गई, लेकिन बाद में इसमें तेज उछाल आया।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि कर सुधारों के चलते राज्यों के राजस्व पर दबाव जरूर है, लेकिन टैक्स रिकवरी और हस्तांतरण से उनका घाटा काफी हद तक कवर हो जाएगा।
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