इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने PCS 2025 प्रीलिम्स रिजल्ट में OBC कैटेगरी के अभ्यर्थियों को जनरल कटऑफ पार करने के बावजूद मेन्स परीक्षा से बाहर करने पर नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया गया है। यह मामला हजारों अभ्यर्थियों को प्रभावित कर सकता है।
याचिका का आधार: जनरल कटऑफ पार करने पर भी बाहर
याचिका मनीष कुमार और तीन अन्य OBC अभ्यर्थियों ने दायर की है। उनका दावा है कि PCS प्रीलिम्स 2025 में उनके अंक जनरल कैटेगरी की कटऑफ से ज्यादा थे, लेकिन उन्हें आरक्षण लाभ नहीं दिया गया और मेन्स के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। आरक्षण नियमों के अनुसार, अगर रिजर्व्ड कैटेगरी का कैंडिडेट जनरल कटऑफ पार करता है, तो उसे जनरल सीट में एडजस्ट किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कोर्ट का निर्देश: तीन हफ्ते में जवाब
न्यायमूर्ति मनीष माथुर की सिंगल बेंच ने याचिका पर सुनवाई की और UPPSC व राज्य सरकार को तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 22 जनवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है।
आरक्षण नियमों का उल्लंघन: माइग्रेशन रूल पर विवाद
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि माइग्रेशन रूल के तहत OBC कैंडिडेट को जनरल में जगह मिलनी चाहिए थी। लेकिन UPPSC ने ऐसा नहीं किया। यह नियम आरक्षण एक्ट का हिस्सा है और इसका पालन अनिवार्य है। अभ्यर्थी लंबे समय से तैयारी करते हैं और ऐसे फैसले उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं।
अभ्यर्थियों में आक्रोश: सोशल मीडिया पर विरोध
PCS 2025 अभ्यर्थी सोशल मीडिया पर विरोध जता रहे हैं। OBC कैटेगरी के कई कैंडिडेट्स ने कहा कि
यह अन्याय है और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यह विवाद मेन्स परीक्षा पर असर डाल सकता है।
UPPSC की स्थिति: जवाब की तैयारी
UPPSC ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन कोर्ट नोटिस के बाद काउंटर एफिडेविट तैयार किया जा रहा है।
आयोग का दावा है कि रिजल्ट नियमों के अनुसार ही घोषित किया गया है।
राजनीतिक असर: आरक्षण पर बहस
यह मामला आरक्षण नीति पर बहस छेड़ रहा है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है,
जबकि सत्ता पक्ष पारदर्शिता का दावा कर रहा है। अभ्यर्थी न्याय की उम्मीद लगाए हैं।
न्याय की उम्मीद
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UPPCS 2025 में OBC अभ्यर्थियों की अयोग्यता पर UPPSC से जवाब मांगा है।
आरक्षण नियमों का उल्लंघन आरोप गंभीर है।
कोर्ट का फैसला अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर डालेगा। पारदर्शिता और न्याय हो
