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योगी सरकार का नया आदेश: सरकारी कर्मचारियों को सिखाई जाएगी AI, खराब परफॉर्मेंस पर रुकेगा प्रमोशन
परिचय: उत्तर प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस की नई पहल
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार राज्य प्रशासन को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन कर्मयोगी के तहत एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है, जिसके अनुसार अब राज्य के सरकारी कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह पहल प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम माना जा रहा है। कैपेसिटी बिल्डिंग को अनिवार्य बनाते हुए AI और साइबर सिक्योरिटी मॉड्यूल शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
AI युग में बदलते सरकारी कामकाज की तैयारी
वर्तमान समय में सरकारी तंत्र को भी तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया के साथ कदम मिलाना होगा। सरकार का उद्देश्य है कि कर्मचारियों को भविष्य की तकनीक—जैसे AI, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन टूल्स—के प्रयोग में कुशल बनाया जाए। इससे न केवल फाइल निपटान की गति बढ़ेगी बल्कि योजनाओं की मॉनिटरिंग और डिलीवरी में भी पारदर्शिता आएगी।
सूत्रों के अनुसार, यह ट्रेनिंग चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी और पहले चरण में प्रमुख विभागों — जैसे राजस्व, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और नगर विकास विभाग — के कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। मिशन कर्मयोगी के तहत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम अनिवार्य किया गया है।
कमजोर प्रदर्शन पर रुकेगा प्रमोशन!
सरकार इस पहल के माध्यम से कर्मचारियों की जवाबदेही भी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद प्रतिभागियों का परफॉर्मेंस मूल्यांकन (Performance Assessment) किया जाएगा। जिन कर्मचारियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहेगा, उनका प्रमोशन रोकने या वार्षिक मूल्यांकन में अंक घटाने का विकल्प भी प्रशासन के पास होगा।
इस कदम का मकसद केवल तकनीकी कौशल सिखाना नहीं, बल्कि कर्मचारियों में कामकाज की दक्षता और नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रशिक्षण को पदोन्नति और ACR से जोड़ा जाए।
कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार
योजना एवं प्रशिक्षण विभाग और सूचना विभाग मिलकर एक डिजिटल ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार कर रहे हैं। इसमें कर्मचारियों को ऑनलाइन मॉड्यूल, लाइव सेशन और परीक्षा के जरिए प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी स्तर पर AI की समझ बढ़ाने से ई-गवर्नेंस, डेटा मैनेजमेंट और शिकायत निवारण की प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी बनेगी। IGOT प्लेटफॉर्म का उपयोग करके विभिन्न विभागों के अच्छे केस स्टडीज को भी अपलोड किया जाएगा।
AI से प्रशासनिक पारदर्शिता में वृद्धि
AI आधारित विश्लेषण से सरकार को योजनाओं की प्रगति, जन शिकायतों के
समाधान, और फंड उपयोग की निगरानी में तत्काल रिपोर्ट मिल सकेगी।
उदाहरण के तौर पर, AI से यह पता चल सकेगा कि किसी जिले में
विकास परियोजनाएं कितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं
या किसी विभाग में फाइलें अटकी क्यों हैं।
इससे समय की बचत होगी और जवाबदेही तय होगी।
यह पहल उत्तर प्रदेश को डिजिटल पावरहाउस बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
आधुनिक प्रशासन की ओर मजबूत कदम
योगी सरकार की यह पहल सरकारी कर्मचारियों को भविष्य के लिए तैयार करने के साथ-साथ प्रशासन को
अधिक कुशल और पारदर्शी बनाएगी। AI ट्रेनिंग से न केवल दक्षता बढ़ेगी बल्कि नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह कदम उत्तर प्रदेश को तकनीकी रूप से मजबूत राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
