वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में
भक्तों में मायूसी: बांके बिहारी मंदिर में कई दिनों से नहीं सजा फूल बंगला, बदले नियम बने वजह
फूल बंगला परंपरा पर लगा ब्रेक
वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में इस बार एक पुरानी परंपरा टूटती नजर आ रही है। गर्मियों में प्रतिदिन सुबह और शाम को सजने वाला फूल बंगला कई दिनों से नहीं सज पा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं में निराशा देखने को मिल रही है।
बुधवार को फिर नहीं सजा फूल बंगला
बुधवार सुबह भी मंदिर में फूल बंगला नहीं सज सका। हालांकि सेवायतों ने परंपरा निभाते हुए ठाकुरजी को जगमोहन में फूलों से सजी बैठक में विराजमान कराया। यह स्थिति पहली बार देखी जा रही है जब गर्मियों में नियमित रूप से सजने वाला फूल बंगला बार-बार बाधित हो रहा है।
सात बार नहीं सजा फूल बंगला
जानकारी के अनुसार, 29 मार्च से लेकर अब तक सात बार मंदिर में फूल बंगला नहीं सज पाया है। इससे पहले भी छह बार यह परंपरा बाधित हो चुकी है। इससे मंदिर परिसर की रौनक भी कम हो गई है और भक्तों में निराशा बढ़ गई है।
नियमों में बदलाव बना मुख्य कारण
इस बदलाव के पीछे मंदिर की हाईपावर्ड प्रबंध समिति के नए नियमों को मुख्य कारण बताया जा रहा है। समिति ने फूल बंगला सेवा का शुल्क करीब दस गुना बढ़ा दिया है और साथ ही पूजन की अनुमति भी सीमित कर दी है। इन कारणों से श्रद्धालु इस सेवा से पीछे हट रहे हैं।
भक्तों में घटी उत्साह की भावना
पहले जहां फूल बंगला सजाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रहती थी और एक साल पहले से बुकिंग कराई जाती थी,
वहीं इस बार मंदिर के चबूतरे और चौक में वह रौनक नजर नहीं आ रही है।
लाखों रुपये खर्च कर सेवा करने वाले भक्त अब पीछे हट रहे हैं।
सेवायतों ने उठाए सवाल
मंदिर के सेवायत रजत गोस्वामी ने बताया कि शुल्क को
दस गुना बढ़ा दिया गया है। ऐसे में श्रद्धालु चाहते हैं कि
वे अपने आराध्य का पूजन भी कर सकें, लेकिन उन्हें
यह अधिकार नहीं दिया जा रहा है। इससे भक्तों में नाराजगी है।
वहीं सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि शुल्क को बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दिया गया है और
पूजन का अधिकार भी छीन लिया गया है। उन्होंने इस बढ़ोतरी पर
सवाल उठाते हुए कहा कि समिति द्वारा यह शुल्क क्यों बढ़ाया गया, यह स्पष्ट नहीं है।
बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला परंपरा का टूटना केवल
एक धार्मिक व्यवस्था का बदलाव नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से
जुड़ा मुद्दा बन गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो यह परंपरा और प्रभावित हो सकती है।
