सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक विवादित फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने यौन हमले के मामले में पीड़िता के प्रति असंवेदनशील टिप्पणियां कीं, जिसे CJI ने पीड़ितों पर ‘भयावह प्रभाव’ डालने वाला बताया।
घटना का पूरा विवरण
दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसकी अध्यक्षता CJI सूर्यकांत कर रहे थे, ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा के फैसले पर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने दो आरोपियों पर लगे IPC धारा 376 (बलात्कार प्रयास) और POCSO अधिनियम धारा 18 के आरोप हटा दिए थे। कोर्ट ने कहा कि पैजामा का नाड़ा तोड़ना या निजी अंग छूना पर्याप्त नहीं है, इसे धारा 354B (कपड़े उतारने का प्रयास) और POCSO धारा 9/10 के तहत चलाया जाए।
इस फैसले में हाईकोर्ट की टिप्पणियां जैसे ‘सिंपली टचिंग प्राइवेट पार्ट्स’ को रेप प्रयास न मानना विवादास्पद रहीं। सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में इसकी शिकायत की और अन्य हाईकोर्ट केसों का जिक्र किया, जैसे कोलकाता और राजस्थान हाईकोर्ट की असंवेदनशील टिप्पणियां।
CJI सूर्यकांत की फटकार के कारण
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि अदालतें, खासकर हाईकोर्ट, फैसलों में ऐसी ‘दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियां’ हर हाल में避免 करें। उन्होंने इसे ‘असंवेदनशील और अमानवीय’ करार दिया, जो पीड़िताओं पर चिलिंग इफेक्ट डालता है और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाता है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर ट्रायल कोर्ट में केस वापस भेज दिया।
*CJI ने सभी हाईकोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी करने का संकेत दिया
। यह कदम न्यायिक संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए उठाया गया,
क्योंकि ऐसी टिप्पणियां समाज पर बुरा असर डालती हैं।
अन्य संबंधित घटनाएं
CJI सूर्यकांत ने पहले भी हाईकोर्ट जजों पर टिप्पणी की है। सितंबर 2025 में उन्होंने कुछ
हाईकोर्ट जजों को मुकदमे बार-बार स्थगित करने पर फटकारा, कहा कि
इससे उनकी छवि खराब होती है। जनवरी 2026 में झारखंड हाईकोर्ट के वकील को
अवमानना मामले में चेतावनी दी। ये घटनाएं
न्यायपालिका की अनुशासनहीनता पर CJI के सख्त रुख को दर्शाती हैं।
कानूनी प्रभाव और आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। यह फैसला POCSO और यौन अपराध मामलों में
जजों की भाषा पर नियंत्रण लगाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पीड़िताओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा। कुल मिलाकर,
CJI सूर्यकांत का यह रुख न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने वाला है।