26 जनवरी परेड में राहुल-खरगे को तीसरी लाइन में जगह: कांग्रेस क्यों भड़की? प्रोटोकॉल विवाद की पूरी कहानी
नई दिल्ली के राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर 26 जनवरी 2026 को आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद प्रोटोकॉल के अनुसार VIP दर्शक दीर्घा में सीटें आवंटित की गईं। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को तीसरी पंक्ति में जगह दी गई, जबकि पहली दो पंक्तियों में NDA सहयोगी दलों के नेता जैसे जेडीयू के नीतीश कुमार, बीजेडी के नवीन पटनायक और अन्य बैठे। इस ‘अपमान’ से कांग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए, और सोशल मीडिया से लेकर संसद मार्ग तक नारों का दौर शुरू हो गया। कांग्रेस ने इसे ‘लोकतंत्र का अपमान’ करार देते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला।
कांग्रेस की आक्रामक प्रतिक्रिया: ‘हम दूसरे नंबर के नागरिक नहीं’
परेड समाप्त होते ही कांग्रेस मुख्यालय में हंगामा मच गया। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “गणतंत्र दिवस पर लोकतंत्र की रक्षा करने वालों को तीसरी पंक्ति में बिठाना BJP की साजिश है। विपक्ष को दबाने की कोशिश बेकार जाएगी।” मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर NDA नेताओं को प्राथमिकता दी गई, जो संविधान के खिलाफ है। पार्टी के प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनाते और पवन खेड़ा ने टीवी डिबेट्स में चिल्ला-चिल्ला कर कहा, “राहुल गांधी देश के सबसे बड़े विपक्षी नेता हैं, उन्हें दूसरी पंक्ति में होना चाहिए था। यह अपमानजनक है!” कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा कर दी, और यूपी-बिहार में कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर #RahulKhargeInsult और #BJPvsDemocracy जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए।
ऐतिहासिक संदर्भ: प्रोटोकॉल नियम क्या कहते हैं?
भारतीय प्रोटोकॉल के अनुसार, गणतंत्र दिवस परेड में पहली पंक्ति राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए आरक्षित होती है। दूसरी पंक्ति में लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा सभापति और प्रमुख विपक्षी नेता आते हैं। तीसरी पंक्ति अन्य गणमान्य व्यक्तियों के लिए होती है। लेकिन 2026 में खरगे (लोकसभा में विपक्ष नेता नहीं) और राहुल (लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष) को तीसरी लाइन में शिफ्ट करने पर सवाल उठे। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटोकॉल मंत्रालय ने NDA सहयोगियों को प्राथमिकता दी, जो राजनीतिक संतुलन का हिस्सा था। पिछले वर्षों में भी ऐसे विवाद हुए, जैसे 2024 में ममता बनर्जी को पिछली सीट मिलने पर TMC का विरोध। लेकिन इस बार कांग्रेस ने इसे ‘विपक्ष-विरोधी साजिश’ बता दिया।
BJP का पलटवार: ‘प्रोटोकॉल का पालन, कांग्रेस का ड्रामा’
BJP नेताओं ने कांग्रेस की प्रतिक्रिया को ‘सस्ता ड्रामा’ बताया। अमित मल्होत्रा ने कहा, “परेड राष्ट्र का उत्सव है, न कि सियासी रैली। प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन हुआ। राहुल-खरगे को जो सम्मान मिला, वही पर्याप्त था।” नीतीश कुमार ने समर्थन देते हुए कहा, “सभी दलों को जगह मिली, विवाद क्यों?” सोशल मीडिया पर BJP समर्थक ने कांग्रेस को ट्रोल किया, कहते हुए कि “राहुल को VIP सीट की बजाय विपक्ष में रहने की आदत डालनी चाहिए।”
विवाद का प्रभाव: लोकतंत्र पर सवाल
यह विवाद सिर्फ सीटिंग का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का है। कांग्रेस का मानना है कि मोदी
सरकार विपक्ष को कमजोर करने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाती है। वहीं
BJP इसे सामान्य प्रक्रिया बताती है। विशेषज्ञों का कहना है कि
ऐसे मुद्दे संसद सत्र में गूंजेंगे, और 2026 के चुनावों पर असर डाल सकते हैं।
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर सियासी रंग चढ़ना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
आखिरकार, परेड की भव्यता और सैन्य शक्ति प्रदर्शन के बीच यह विवाद एक सबक देता है—
राष्ट्रीय उत्सवों को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।