अजित पवार के निधन के बाद बारामती सीट
बारामती सीट का इतिहास और अजित पवार का उदय
बारामती विधानसभा सीट महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का गढ़ रही है। 1967 से यह सीट परिवार के कब्जे में है, जब शरद पवार ने यहां से जीत दर्ज की। बारामती चीनी सहकारी समितियों, बैंकों और स्थानीय संस्थाओं के जरिए आर्थिक और राजनीतिक ताकत का केंद्र बना। 1991 में शरद पवार ने लोकसभा के लिए सीट छोड़ी तो उनके भतीजे अजित पवार ने कांग्रेस टिकट पर यहां से चुनाव जीता। 1999 में एनसीपी बनने के बाद अजित ने इसे मजबूत किया। उन्होंने लगातार चुनाव जीते, 2024 में भतीजे युगेंद्र को 1,00,899 वोटों से हराया। अजित ने बारामती को ‘बारामती मॉडल’ के तहत कृषि, उद्योग और तकनीक से जोड़ा, एफडीआई आकर्षित किया और किसानों की आय बढ़ाई। उन्होंने 1980 के दशक से राजनीति शुरू की, 1991 में लोकसभा सदस्य बने और कई बार डिप्टी सीएम रहे। 2019 और 2023 में एनसीपी विभाजन में वे अलग गुट के नेता बने।
अजित पवार के निधन के बाद विरासत का सवाल
28 जनवरी 2026 को बारामती में प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन महाराष्ट्र राजनीति में बड़ा झटका है। 66 साल की उम्र में उनका जाना एनसीपी में वैक्यूम पैदा कर गया। बारामती, जहां उन्होंने दशकों तक राज किया, अब उत्तराधिकार की जंग का मैदान बन सकती है। परिवार विभाजित है – शरद पवार गुट और अजित गुट। सवाल है कि उनकी विरासत कौन संभालेगा? पत्नी सुनेत्रा, बेटे पार्थ-जय या भतीजा युगेंद्र? यह फैसला एनसीपी की एकता और महाराष्ट्र की गठबंधन राजनीति को प्रभावित करेगा। शरद पवार अब पार्टी एकजुट करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन अजित के विधायकों का भविष्य अनिश्चित है।
दावेदार: सुनेत्रा पवार (पत्नी)
सुनेत्रा पवार, अजित की पत्नी, प्रमुख दावेदार हैं। पूर्व मंत्री पदमसिंह बाजीराव पाटिल की बेटी, वे पर्यावरण कार्यों के लिए जानी जाती हैं। बारामती टेक्सटाइल कंपनी की चेयरपर्सन और सामाजिक कार्यकर्ता। 2024 में वे राज्यसभा एमपी बनीं। 2024 लोकसभा चुनाव में बारामती से सुप्रिया सुले से हार गईं। अजित के बाद वे पार्टी में केंद्र बन सकती हैं, लेकिन जन समर्थन की चुनौती है। परिवार में वे श्रीनिवास पवार की भाभी और पार्थ-जय की मां हैं।
दावेदार: पार्थ पवार और जय पवार (बेटे)
अजित के बेटे पार्थ और जय भी दावेदार हैं। पार्थ, बड़ा बेटा, 2019 लोकसभा चुनाव में मावल से हार गए। वे युवा एनसीपी में सक्रिय, लेकिन राजनीतिक अनुभव कम। जय, छोटा बेटा, भी 2019 में चुनाव लड़े लेकिन असफल। दोनों पवार王朝 के वारिस माने जाते हैं,
लेकिन अजित की तरह व्यक्तिगत पकड़ नहीं। पार्थ बारामती में स्थानीय मुद्दों पर काम करते हैं,
जबकि जय बिजनेस बैकग्राउंड से हैं। निधन के बाद उनकी भूमिका बढ़ सकती है, लेकिन शरद गुट से टकराव संभव।
दावेदार: युगेंद्र पवार (भतीजा)
युगेंद्र पवार, अजित के ग्रैंडनेफ्यू (श्रीनिवास के बेटे), शरद गुट से हैं।
2024 में अजित से बारामती चुनाव हारे। वे युवा चेहरा हैं,
शरद पवार के करीबी। राजनीतिक इतिहास नया है, लेकिन परिवार की विरासत से जुड़े।
अगर एनसीपी एकजुट होती है, तो वे बारामती संभाल सकते हैं।
अन्य दावेदार: सुप्रिया सुले और पवार परिवार
सुप्रिया सुले, शरद की बेटी और अजित की कजिन, बारामती लोकसभा एमपी हैं। एनसीपी (एसपी) की लोकसभा नेता,
वे परिवार की आवाज। रोहित पवार भी शरद गुट से हैं।
अजित का जाना परिवार को एकजुट कर सकता है