जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सदर-ए-रियासत डॉ. कर्ण सिंह ने केंद्र सरकार से संसद में किए गए पुराने आश्वासन को पूरा करने की अपील की है। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को और मजबूत बनाया जा सके।
डॉ. कर्ण सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के विधानसभा चुनावों के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार उठ रही है। उनके बयान ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।
$डॉ. कर्ण सिंह ने क्या कहा?
डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि जब वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया गया था, तब संसद में यह आश्वासन दिया गया था कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और विधानसभा चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को अपना वादा निभाते हुए जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देना चाहिए।
उनका मानना है कि इससे जनता का लोकतंत्र पर विश्वास और मजबूत होगा तथा प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगी।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद क्या बदला था?
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A से जुड़े विशेष प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया।
उस समय केंद्र सरकार की ओर से यह कहा गया था कि उचित समय आने पर जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा दिया जा सकता है। हालांकि इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की गई थी।
इसी आश्वासन का उल्लेख करते हुए अब डॉ. कर्ण सिंह ने सरकार से अपना वादा पूरा करने की अपील की है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था को कैसे मिलेगा लाभ?
राज्य का दर्जा बहाल करने के समर्थकों का मानना है कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं अधिक मजबूत होंगी।
उनके अनुसार—
- निर्वाचित सरकार को अधिक प्रशासनिक अधिकार मिलेंगे।
- नीतिगत फैसले लेने की क्षमता बढ़ेगी।
- विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
- जनता की भागीदारी और जवाबदेही मजबूत होगी।
- स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।
समर्थकों का यह भी कहना है कि पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से शासन व्यवस्था अधिक स्थिर और जवाबदेह बन सकती है।
चुनाव के बाद क्यों तेज हुई मांग?
हाल के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग और अधिक तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं का कहना है कि जब जनता ने अपने प्रतिनिधियों को चुन लिया है, तो उन्हें पूर्ण प्रशासनिक अधिकार भी मिलने चाहिए।
कई सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि राज्य का दर्जा मिलने से रोजगार, निवेश, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिल सकती है।
हालांकि इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय भी सामने आती रही है।
केंद्र सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
डॉ. कर्ण सिंह के बयान के बाद विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार से संसद में दिए गए आश्वासन को पूरा करने की मांग दोहराई है।
उनका कहना है कि यदि सरकार ने पहले राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही थी,
तो अब इस दिशा में स्पष्ट कदम उठाए जाने चाहिए।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से इस विषय पर भविष्य में क्या निर्णय लिया जाएगा,
इसका अंतिम फैसला संसद और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
आगे क्या हो सकता है?
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्णय केंद्र सरकार और संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
यदि सरकार इस दिशा में विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाती है, तो जम्मू-कश्मीर की
प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन डॉ. कर्ण सिंह के बयान के बाद
यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस देने की मांग नई नहीं है, लेकिन हाल के
राजनीतिक घटनाक्रम और विधानसभा चुनावों के बाद यह मुद्दा फिर प्रमुखता से सामने आया है।
डॉ. कर्ण सिंह ने केंद्र सरकार को संसद में दिए गए आश्वासन की याद दिलाते हुए लोकतांत्रिक
व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की अपील की है।
अब इस विषय पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संसद की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा।
इसलिए आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और
संवैधानिक स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
FAQ
प्रश्न 1: डॉ. कर्ण सिंह ने क्या मांग की है?
उन्होंने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने और
संसद में किए गए आश्वासन को पूरा करने की अपील की है।
प्रश्न 2: जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा कब समाप्त हुआ था?
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव और पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा समाप्त कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
प्रश्न 3: क्या राज्य का दर्जा बहाल करने पर कोई आधिकारिक घोषणा हुई है?
फिलहाल राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर कोई नई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
प्रश्न 4: राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्णय कौन लेगा?
इस संबंध में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संसद की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।
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