नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025 – रूस और भारत के बीच रक्षा संबंधों का इतिहास लंबा और मजबूत रहा है। लेकिन हाल के दिनों में रूस का Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट भारत के लिए एक नया मोड़ लेकर आया है। दुबई एयर शो 2025 में रूसी कंपनी रोस्टेक के सीईओ सर्गेई चेमेजोव ने खुलासा किया कि रूस भारत को Su-57 की पूरी तकनीक ट्रांसफर करने को तैयार है। अगर यह सौदा पक्का होता है, तो भारत में ही इस 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट का उत्पादन शुरू हो सकता है। लेकिन सवाल यह उठता है – Su-57 भारत में बना तो क्या होगा? और इसे ‘स्वदेशी’ रूसी जेट कहकर प्रचारित करने के बावजूद, पश्चिमी विशेषज्ञ इसे खतरा क्यों बता रहे हैं? आइए, इसकी गहराई में उतरें।
Su-57: रूस की 5वीं पीढ़ी की ताकत
Su-57, जिसे फेलॉन (Felon) भी कहा जाता है, रूस का सबसे उन्नत स्टेल्थ फाइटर जेट है। यह अमेरिका के F-35 या F-22 का प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं हैं:
- स्टेल्थ क्षमता: रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) मात्र 0.1 वर्ग मीटर, जो इसे दुश्मन रडार से लगभग अदृश्य बनाती है।
- सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के मच 1.6 की रफ्तार, 3,500 किमी की रेंज।
- हथियार: 12 मिसाइलें (R-37M जैसी 400 किमी रेंज वाली), हाइपरसोनिक हथियारों के लिए अनुकूल।
- सेंसर: AESA रडार, IRST, AI-आधारित एवियोनिक्स।
रूस ने इसे यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल किया है, जहां यह पेट्रियट और IRIS-T जैसे पश्चिमी सिस्टमों को चकमा दे चुका है। भारत के संदर्भ में, रूस का ऑफर शानदार है: 40 विमान सीधे सप्लाई, 90 भारत में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के नासिक प्लांट में असेंबल। 100% तकनीक ट्रांसफर, जिसमें इंजन (117S), स्टील्थ मटेरियल, एवियोनिक्स और सोर्स कोड शामिल। कीमत? F-35 से 40% कम, लगभग 100 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट।
भारत में Su-57 बनाने का मतलब: अवसर या जाल?
अगर Su-57 भारत में बनता है, तो यह ‘मेक इन इंडिया’ का सबसे बड़ा झटका होगा। HAL के नासिक प्लांट,
जहां पहले से Su-30MKI बनता है, को हब बनाया जा सकता है। इससे:
- रोजगार और अर्थव्यवस्था: 50,000 नौकरियां, MSME चेन में 10,000 करोड़ का निवेश। टाइटेनियम, कंपोजिट्स और इंजन तकनीक का स्थानिकरण।
- रणनीतिक स्वायत्तता: भारतीय हथियार (ब्रह्मोस, आस्त्र) आसानी से इंटीग्रेट। कोई अमेरिकी प्रतिबंध (CAATSA) का डर नहीं।
- AMCA को बूस्ट: भारत का स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का AMCA प्रोजेक्ट (15,000 करोड़ आवंटित) को ट्रेनिंग ग्राउंड मिलेगा। इंजन टेक्नोलॉजी 10 साल आगे बढ़ेगी।
रूस ने कहा, “जो कुछ भारत को चाहिए, हम देंगे।” यह S-400 डील के बाद भारत-रूस साझेदारी को नई ऊंचाई देगा।
पाकिस्तान के J-10C और चीन के J-20 के मुकाबले IAF को तुरंत 5 स्क्वाड्रन मिलेंगे,
जो 2030 तक AMCA आने तक ब्रिज का काम करेंगे।
लेकिन खतरा क्यों? पश्चिमी चेतावनी और आलोचनाएं
फिर भी, पश्चिमी विशेषज्ञ Su-57 को ‘खतरा’ बता रहे हैं। क्यों? नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस इसे ‘कबाड़’ बेचने की कोशिश कर रहा है। कारण:
- स्टेल्थ की कमजोरी: RCS वास्तव में 1 वर्ग मीटर से ज्यादा, F-35 (0.001) से कम प्रभावी। इंजन (AL-41F1) पुराना, 2025 तक अपग्रेडेड 117S ही आएगा।
- प्रोडक्शन समस्या: रूस ने सिर्फ 20-22 Su-57 बनाए, यूक्रेन युद्ध और सैंक्शंस से प्रभावित। भारत को ‘डिस्काउंट’ ऑफर (30% कम) इसलिए, क्योंकि बिक्री नहीं हो रही।
- FGFA का काला इतिहास: 2007 में भारत-रूस ने FGFA प्रोजेक्ट शुरू किया, लेकिन 2018 में भारत बाहर हो गया। कारण? 3 अरब डॉलर बर्बाद, डिजाइन फ्लॉड, स्टील्थ अपर्याप्त। अब वही जेट ‘स्वदेशी’ बनाकर बेचना संदिग्ध।
- जियोपॉलिटिकल रिस्क: अमेरिका F-35 ऑफर कर रहा है, लेकिन CAATSA का डर। Su-57 लेने से QUAD साझेदारी कमजोर? ओपइंडिया के अनुसार, Su-57 सस्ता और कस्टमाइजेबल है, लेकिन F-35 की तरह ‘प्रूवन’ नहीं।