भारतीय रेलवे की दो प्रमुख ट्रेनों — कुशीनगर एक्सप्रेस और सप्तक्रांति एक्सप्रेस — में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब रेलवे विजिलेंस टीम ने अचानक छापा मार दिया। इस आकस्मिक कार्रवाई ने न केवल रेलवे कर्मचारियों को हिला कर रख दिया, बल्कि ट्रेन में सवार यात्रियों में भी खलबली मचा दी। भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए यह ऑपरेशन देर रात शुरू हुआ और तड़के सुबह तक जारी रहा।
विजिलेंस टीम की तैयारी
और स्थान चयनसूत्रों के अनुसार, विजिलेंस विभाग को पिछले कई दिनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ रेल कर्मचारियों और टिकट निरीक्षकों द्वारा बिना टिकट यात्रा करने वालों से ऑन-द-स्पॉट वसूली की जा रही है
। इन शिकायतों के आधार पर विजिलेंस ने गुप्त जांच शुरू की
।टीम ने पहले कई बार दोनों ट्रेनों की गतिविधियों पर नज़र रखी। जब जानकारी पुख्ता हुई, तो शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात इस कार्रवाई को अंजाम देने का निर्णय लिया गया।
कुशीनगर एक्सप्रेस (11015/11016) जो मुंबई से गोरखपुर जाती है, और सप्तक्रांति एक्सप्रेस (12557/12558) जो दिल्ली से मुजफ्फरपुर तक चलती है, दोनों ही यात्रियों की भीड़ और लंबी दूरी की ट्रेनों के रूप में जानी जाती हैं। ऐसे में निरीक्षण के दौरान गड़बड़ी की संभावनाएं अधिक रहती हैं।
छापे की पूरी कार्रवाई
जैसे ही ट्रेनें गोरखपुर और बापूधाम मोतीहारी रेलवे सेक्शन के आसपास पहुंचीं, विजिलेंस टीम ने अलग-अलग डिब्बों में प्रवेश किया। अधिकारी सादे कपड़ों में थे ताकि किसी को पहले से भनक न लगे। प्रत्येक बोगी में यात्रियों से टिकट जांची गई और किसी भी संदिग्ध व्यवहार को तुरंत नोट किया गया।
विजिलेंस सूत्रों ने बताया कि कई टीटीई और कर्मचारियों से मौके पर ही पूछताछ की गई। कुछ कर्मचारियों के पास ऐसे यात्रियों की लिस्ट मिली जिनसे नकद वसूली की गई थी लेकिन रेलवे सिस्टम में वह टिकट एंट्री दर्ज नहीं थी। इस सबूत को विजिलेंस ने जब्त कर लिया है। कुछ कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी जांच के लिए सीज़ किए गए
यात्रियों में मचा हड़कंप
अचानक बोगियों में जब सादे कपड़ों में अधिकारी घुसे और पूछताछ शुरू की, तो यात्रियों में खलबली मच गई। कई यात्रियों को लगा कि कोई सुरक्षा जांच चल रही है, पर जब लोगों को पता चला कि यह विजिलेंस का छापा है, तो वे हैरान रह गए। कुछ यात्रियों ने बताया कि पहले भी इस रूट पर टिकट ब्लैक में बेचने जैसी गतिविधियां होती थीं,
लेकिन इतनी सख्त जांच पहली बार हुई है।एक यात्री ने बताया, “हम अक्सर देखते हैं कि बिना टिकट वाले लोग जेब में कुछ पैसे देकर बैठ जाते हैं। आज विजिलेंस वालों को देखकर सब बेचैन हो गए।”
रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने विजिलेंस टीम की इस कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह अभियान नियमित निगरानी का हिस्सा है और यात्रियों से की गई किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है।
अधिकारी ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी ट्रेन में कोई अनियमितता नहीं हो। यात्रियों को साफ-सुथरी और निष्पक्ष सेवा मिलनी चाहिए।”रेलवे मुख्यालय से यह निर्देश भी जारी हुआ है कि जिन कर्मचारियों पर संदिग्ध गतिविधि का आरोप लगेगा, उन पर विभागीय जांच होगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो तत्काल निलंबन और सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है।
सामाजिक और आर्थिक
असरइस तरह की विजिलेंस कार्रवाइयों का असर न केवल रेलवे प्रणाली की पारदर्शिता पर पड़ता है, बल्कि आम यात्रियों का भरोसा भी मजबूत करता है। खासकर त्योहारों के सीजन में, जब टिकट की मांग अत्यधिक होती है, तब इस प्रकार की छापेमारी से टिकट माफिया और भ्रष्ट कर्मचारियों पर लगाम लगाई जा सकती है।
रेलवे की साख कायम रखने के लिए इस तरह की छापेमारी जरूरी मानी जा रही है। आम लोगों का कहना है कि अगर ऐसे अभियान नियमित रूप से चलते रहें तो यात्रियों से अवैध वसूली की घटनाएं बहुत हद तक कम हो सकती हैं।
