अमरीश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पंजाब में पूरी की और बाद में शिमला के बी.एम. कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। पढ़ाई के बाद वे मुंबई चले गए, जहां उन्होंने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में क्लर्क की नौकरी शुरू की, क्योंकि फिल्मों में एंट्री के शुरुआती प्रयास नाकाम रहे।
थिएटर से फिल्मी सफर की शुरुआत
1960 के दशक में अमरीश ने रंगमंच से अभिनय करियर की शुरुआत की, जहां सत्यदेव दुबे और गिरीश कर्नाड के नाटकों में काम किया। 1979 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड से सम्मानित होकर उन्होंने थिएटर में पहचान बनाई। फिल्मी दुनिया में पहला ब्रेक 1971 की ‘प्रेम पुजारी’ से मिला, लेकिन स्थापना में समय लगा। असली सफलता 1980 के दशक में खलनायकी के किरदारों से मिली, जैसे ‘त्रिदेव’, ‘घायल’ और ‘विश्वात्मा’।
मोगैंबो: अमर किरदार
1987 की ‘मिस्टर इंडिया’ में मोगैंबो का डायलॉग “मोगैंबो खुश हुआ” ने उन्हें अमर बना दिया। इस किरदार ने उनकी गहरी आवाज और मौजूदगी को चरम पर पहुंचाया। उसी दौर में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में सख्त पिता की भावुक भूमिका ने विविधता दिखाई। अमरीश ने 400 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिसमें ‘करण अर्जुन’, ‘दामिनी’, ‘कोयला’ जैसी हिट्स शामिल हैं।
हॉलीवुड में धमाल
1984 की ‘इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम’ में मोला राम का किरदार निभाकर उन्होंने हॉलीवुड में जगह बनाई। इस रोल के लिए अपना सिर मुंडवाया, जो उनकी समर्पण भावना दर्शाता है।
निजी जीवन और विरासत
अमरीश ने उर्मिला से विवाह किया, जिनसे पुत्र राजीव और पुत्री नामिता हुए। 12 जनवरी 2005 को मुंबई में 72 वर्ष की आयु में कैंसर से उनका निधन हो गया। उनकी विरासत आज भी फिल्मों में जीवित है।