
जलस्तर, लोग जता रहे 1978 का रिकॉर्ड टूटने की आशंका, वर्तमान में जलस्तर 69.92 मीटर है यह प्रति 4 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है। बता दे कि बनारस में चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है जो जल्दी पार हो सकता है!
वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर अब चेतावनी स्तर (वार्निंग लेवल) के करीब पहुंच गया है और तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर लगभग 70.26 मीटर की चेतावनी सीमा के पार है और खतरे के निशान के बहुत करीब पहुंच चुका है, जो करीब 71.26 मीटर है।
जलस्तर प्रति घंटे 2 से 4 सेंटीमीटर की दर से बढ़ रहा है, जिससे घाटों पर पानी भर गया है और कई इलाके जलमग्न हो चुके हैं। अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट जैसे पुराने घाट भी पूरी तरह डूब चुके हैं, जिसके कारण वन्यजीवन, लोगों के आवागमन और पूजा-अर्चना प्रभावित हो रही है।
पूरा वाराणसी शहर और आसपास के इलाके बाढ़ के खतरे के कारण सतर्क हो गए हैं। प्रशासन ने भी राहत शिविरों को सक्रिय किया है और सतर्कता बढ़ाई हुई है। गंगा के साथ-साथ सहायक नदियों वरुणा व रस्सी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाके जलमग्न हो रहे हैं। वर्षा और बांधों से छोड़े गए पानी के कारण जलस्तर में वृद्धि हुई है, जिससे काशी घाटों पर पानी का सैलाब आ गया है।
लोगों में 1978 के बाढ़ रिकॉर्ड टूटने की आशंका है।इस स्थिति में काशी में बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासन सहित जनता को सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। नाव सेवाओं पर रोक लगाई गई है और संभावित प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
बाढ़ का खतरा काफी गंभीर है, लेकिन मौजूदा जलस्तर स्थिर हो जाने पर राहत मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।संक्षेप में, वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर अब डराने लगा है, जो चेतावनी और खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका है, जिसके कारण बाढ़ की स्थिति बनाई जा रही है और प्रशासन सावधानीपूर्वक बचाव कार्य कर रहा है। इस स्थिति पर निगरानी और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।