शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
उत्तर प्रदेश में एक बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणियों से आहत होकर उपायुक्त (कर) प्रशांत सिंह ने अपना पद छोड़ दिया। उन्होंने इस्तीफा देते हुए स्पष्ट कहा कि “एक चुने हुए मुख्यमंत्री के लिए शंकराचार्य की ओर से की गई टिप्पणियां बेहद अपमानजनक हैं। योगी आदित्यनाथ मेरे बॉस हैं और मैं उनके प्रति पूर्ण निष्ठावान हूं।”
क्या थी शंकराचार्य की टिप्पणी?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में एक धार्मिक सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कुछ टिप्पणियां की थीं, जिन्हें कई लोगों ने मुख्यमंत्री की छवि और कार्यशैली पर हमला माना। इन टिप्पणियों में मुख्यमंत्री की कुछ नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाए गए थे। यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और विभिन्न वर्गों में बहस छिड़ गई।
प्रशांत सिंह, जो वर्तमान में कर विभाग में उपायुक्त के पद पर तैनात थे, ने इन टिप्पणियों को व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक माना। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि “मैं एक सिविल सर्वेंट हूं और मेरी निष्ठा चुने हुए सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति है। किसी भी धार्मिक नेता द्वारा मुख्यमंत्री पर की गई ऐसी टिप्पणियां मेरे लिए अस्वीकार्य हैं।”
इस्तीफे का पूरा विवरण
प्रशांत सिंह ने अपना इस्तीफा मुख्य सचिव कार्यालय को भेजा है। उन्होंने इस्तीफे में स्पष्ट किया कि यह फैसला उनकी व्यक्तिगत आस्था और निष्ठा का परिणाम है। उन्होंने लिखा: “योगी आदित्यनाथ जी मेरे बॉस हैं। उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। ऐसे में किसी भी टिप्पणी से उनकी छवि को ठेस पहुंचाना मेरे लिए बर्दाश्त से बाहर है।”
इस्तीफा पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि वह अब सरकारी सेवा से मुक्त होकर सामाजिक और धार्मिक कार्यों में योगदान देना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा शंकराचार्य के बयान के विरोध में है, न कि सरकार या मुख्यमंत्री के खिलाफ।
सोशल मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। #PrashantSinghResigns और #YogiMyBoss
जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। भाजपा समर्थकों ने प्रशांत सिंह की निष्ठा की सराहना की,
जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे “प्रशासनिक दबाव का नतीजा” बताया।
कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या एक सिविल सर्वेंट को धार्मिक नेता के बयान पर इस्तीफा देना चाहिए,
जबकि अन्य ने इसे व्यक्तिगत फैसला करार दिया।
मुख्यमंत्री और प्रशासन की प्रतिक्रिया
अभी तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या राज्य सरकार की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा स्वीकार करने या न करने का फैसला जल्द लिया जाएगा।
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि प्रशांत सिंह का प्रदर्शन अच्छा रहा है और उनका इस्तीफा अप्रत्याशित है।
क्या है आगे की संभावना?
प्रशांत सिंह का इस्तीफा उत्तर प्रदेश में धर्म, राजनीति और प्रशासन के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है।
अगर इस्तीफा स्वीकार हो गया तो यह एक सिविल सर्वेंट के लिए असामान्य कदम होगा,
जो अपनी निष्ठा को धार्मिक-राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर रखता है।
यह घटना न केवल प्रशांत सिंह की व्यक्तिगत पसंद का मामला है,
बल्कि यह भी दिखाती है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक नेताओं के
बयान कितनी तेजी से प्रशासनिक और राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।