उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर तहसील अंतर्गत एक ग्रामीण इलाके में सोमवार सुबह प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। लगभग 50 साल पुरानी अवैध मजार को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। यह मजार सरकारी राजस्व भूमि (ग्राम समाज/नंबर 1) पर बनी हुई थी, जिसके खिलाफ पिछले कई महीनों से नोटिस जारी किए जा रहे थे। लेकिन मालिक पक्ष और स्थानीय लोगों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद प्रशासन ने अंतिम विकल्प के तौर पर बुलडोजर एक्शन लिया।
कार्रवाई का विवरण
सुबह 6 बजे के आसपास सलेमपुर तहसीलदार, एसडीएम, पुलिस क्षेत्राधिकारी और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बुलडोजर ने मजार की संरचना को तेजी से ध्वस्त करना शुरू किया। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए कार्रवाई पूरी की। करीब 700 ग्रामीण महिलाओं-बच्चों समेत मौके पर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को नियंत्रित रखा। किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
प्रशासन का कहना है कि यह मजार बिना किसी वैध अनुमति के सरकारी जमीन पर बनी थी। उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के बाद भी सरकारी भूमि पर धार्मिक स्थल नहीं बनाए जा सकते। पिछले 6 महीनों में कम से कम 5 नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसलिए अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत यह कार्रवाई अनिवार्य हो गई।
सियासी बवाल और प्रतिक्रिया
कार्रवाई के तुरंत बाद सियासी पार्टियों में हलचल मच गई। समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष ने इसे “सांप्रदायिकता की नई मिसाल” बताया और कहा कि योगी सरकार मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है। कांग्रेस ने भी ट्वीट कर सरकार पर हमला बोला और कहा कि 50 साल पुरानी संरचना को तोड़ना अन्याय है। वहीं, बीजेपी और प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह धार्मिक कार्रवाई नहीं, बल्कि कानून का पालन है।
बीजेपी नेता ने कहा, “सरकारी जमीन पर कोई भी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे वह मजार हो, मंदिर हो या कोई अन्य ढांचा – नियम सबके लिए बराबर हैं।” वहीं, कुछ स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि कार्रवाई सही है, लेकिन इसे और संवेदनशील तरीके से किया जाना चाहिए था ताकि साम्प्रदायिक तनाव न फैले।

स्थानीय लोगों की भावनाएं
मजार के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में मिश्रित भावनाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है
कि यह जगह सदियों से पूजा-पाठ के लिए इस्तेमाल होती थी, जबकि प्रशासन के पक्षधर कहते हैं
कि यह अवैध कब्जा था और सरकारी जमीन को खाली करना जरूरी था।
कई लोग चिंतित हैं कि इससे इलाके में तनाव बढ़ सकता है।
क्या होगा आगे?
प्रशासन ने कहा है कि ध्वस्त की गई संरचना के मलबे को हटाकर जमीन को पूरी तरह खाली कराया जाएगा।
साथ ही, इस तरह के अन्य अतिक्रमणों पर भी नजर रखी जा रही है।
देवरिया जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है
कि वे कानूनी तरीके से किसी भी धार्मिक स्थल के लिए आवेदन करें, ताकि आगे ऐसी कार्रवाई न करनी पड़े।
यह घटना उत्तर प्रदेश में अतिक्रमण हटाओ अभियान का हिस्सा है,
जो पिछले कुछ सालों से तेजी से चल रहा है।
लेकिन धार्मिक संवेदनशीलता के कारण ऐसी कार्रवाइयां हमेशा सियासी बवाल का कारण बनती हैं।
देवरिया की यह घटना अब प्रदेश की राजनीति में गर्म बहस का विषय बन चुकी है।
