उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ही तेज हलचल शुरू हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और तेलंगाना विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने यूपी में पार्टी का विस्तार करने का ऐलान किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि AIMIM अब यूपी के मुस्लिम वोटबैंक को एकजुट करेगी। यह बयान हाल ही में एक रैली में आया, जहां ओवैसी ने योगी सरकार पर मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभाव का आरोप लगाया।
AIMIM का उत्तर प्रदेश में विस्तार: रणनीति और लक्ष्य
AIMIM ने यूपी में अपनी जड़ें मजबूत करने की शुरुआत कर दी है। 2023 के निकाय चुनावों में पार्टी ने मुस्लिम बहुल इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया था। अब 2027 विधानसभा चुनाव के लिए AIMIM 100 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। अकबरुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट कहा, “हम योगी जी को चुनौती देते हैं कि वे मुस्लिमों के हक के लिए काम करें, वरना AIMIM मैदान में उतरेगी।” पार्टी का मुख्य फोकस पूर्वांचल के जिलों पर है, जैसे गोरखपुर, आजमगढ़, रामपुर और सहारनपुर, जहां मुस्लिम आबादी 20-30% तक है।
मुख्य लक्ष्य क्षेत्रों में गोरखपुर, बहराइच, मुरादाबाद और फिरोजाबाद शामिल हैं। रणनीति में स्थानीय मुस्लिम नेताओं को टिकट देना, सोशल मीडिया पर जोरदार कैंपेन और हाईकोर्ट के मामलों पर फोकस शामिल है। 2022 विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 10 सीटों पर लड़कर करीब 2% वोट शेयर हासिल किया था।
ओवैसी भाइयों—असदुद्दीन और अकबरुद्दीन—की सियासी ताकत अब यूपी तक पहुंच रही है। अकबरुद्दीन ने योगी को निशाना बनाते हुए कहा कि BJP की ‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’ मुस्लिमों को डराएगी नहीं, बल्कि उन्हें एकजुट करेगी।
योगी आदित्यनाथ vs अकबरुद्दीन ओवैसी: सियासी जंग की शुरुआत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने AIMIM की चुनौती पर अभी तक कोई सीधा जवाब नहीं दिया है, लेकिन BJP नेता इसे ‘वोटबैंक पॉलिटिक्स’ करार दे रहे हैं। योगी सरकार का दावा है कि यूपी में विकास और कानून-व्यवस्था सबसे ऊपर है, न कि जाति-धर्म। फिर भी, ओवैसी की चुनौती ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। 2024 लोकसभा चुनावों में SP-BSP गठबंधन ने मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण किया था, अब AIMIM इसे तोड़ने की कोशिश कर रही है।
अकबरुद्दीन ओवैसी ने रैली में कहा, “योगी साहब, तैयार हो जाओ… हम यूपी में अपना झंडा लहराएंगे।”
उनका इशारा पार्टी की बढ़ती ताकत की ओर था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि
AIMIM मुख्य रूप से SP और कांग्रेस के मुस्लिम वोट काट सकती है, खासकर मुस्लिम बहुल सीटों पर।
मुस्लिम वोटबैंक पर AIMIM का दांव
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटरों की संख्या 80 लाख से अधिक है, जो कुल वोटों का लगभग 19% है।
AIMIM का दावा है कि वे असंतुष्ट मुस्लिम वोटों को अपनी ओर लुभाएंगे।
पार्टी ने हाल ही में यूपी में 50 नए कार्यालय खोले हैं। ओवैसी ने योगी सरकार के
‘लव जिहाद’ और ‘धर्मांतरण’ कानूनों की आलोचना की, इन्हें मुस्लिम विरोधी बताया।
चुनौतियां भी कम नहीं हैं—SP का मुस्लिमों पर मजबूत पकड़ और BJP का हिंदू वोटबैंक। लेकिन मौके भी हैं,
जैसे पूर्वांचल में असदुद्दीन ओवैसी की लोकप्रियता और युवा मुस्लिमों का सपोर्ट।
छोटी पार्टियों से संभावित गठबंधन की बातचीत भी चल रही है।
2027 यूपी चुनाव की तस्वीर: AIMIM का प्रभाव
2027 विधानसभा चुनाव में AIMIM की एंट्री से सियासत बहुकोणीय हो जाएगी। BJP, SP के अलावा BSP, कांग्रेस और
अब AIMIM मैदान में होंगे। गोरखपुर जैसे शहरों में योगी का गढ़ भी चुनौती का सामना कर सकता है।
राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि AIMIM 5-10 सीटें जीत सकती है,
जो वोट हिस्सेदारी को प्रभावित कर देगी। ओवैसी की चुनौती ने साबित कर दिया कि
यूपी की सियासत अब राष्ट्रीय स्तर की हो गई है।
