23 जनवरी 2026 को अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे तथा ग्रुप एग्जीक्यूटिव सागर अडानी को सीधे ईमेल से समन भेजने की अदालती अनुमति मांगी। यह कदम एक लंबे समय से चल रही सिविल फ्रॉड जांच का हिस्सा है, जिसमें $265 मिलियन (लगभग ₹2200 करोड़) की कथित रिश्वतखोरी स्कीम शामिल है। SEC का कहना है कि भारत सरकार ने पिछले 14 महीनों से पारंपरिक तरीके से समन सर्व करने में बाधा डाली है, इसलिए अब ईमेल और अमेरिका स्थित वकीलों के माध्यम से नोटिस देने की मांग की गई है। इस खबर के तुरंत बाद अडानी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, जो नवंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट है।
शेयर बाजार पर तत्काल प्रभाव
समाचार आने के बाद अडानी ग्रुप की 10 प्रमुख लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक दिन में $12.5 बिलियन (लगभग ₹1.05-1.1 लाख करोड़) घट गया। प्रमुख गिरावटें इस प्रकार रहीं:
- अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस: 10-14% तक लुढ़का।
- अडानी टोटल गैस और अडानी पावर: 6-10% गिरावट।
- अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी ग्रीन, अडानी पोर्ट्स: 8-11% तक नीचे।
- अंबुजा सीमेंट, ACC और संगही इंडस्ट्रीज: 2.5-5.5% की कमी।
ग्रुप का कुल मार्केट कैप 12.45 लाख करोड़ रुपये रह गया। ब्रोकरेज फर्म्स का कहना है कि यह गिरावट अमेरिका-भारत ट्रेड डील की उम्मीदों के बीच आई, लेकिन SEC की नई कार्रवाई ने निवेशकों में भय पैदा कर दिया। अडानी ग्रुप ने स्पष्ट किया कि आरोप निराधार हैं और वे सभी कानूनी कदम उठाएंगे।
जांच का बैकग्राउंड
SEC की जांच नवंबर 2024 में शुरू हुई थी, जब US अथॉरिटीज ने अडानी ग्रुप पर आरोप लगाया कि उन्होंने सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी अनुबंध हासिल करने के लिए $265 मिलियन की रिश्वत दी। जांच में गौतम और सागर अडानी को सीधे नामित किया गया है। SEC का दावा है कि अडानी ग्रीन एनर्जी के US बॉन्ड ऑफरिंग में एंटी-करप्शन और एंटी-ब्राइबरी प्रोग्राम्स के बारे में गलत और भ्रामक बयान दिए गए, जिससे अमेरिकी निवेशकों को धोखा हुआ। यह मामला Hindenburg रिपोर्ट (2023) के बाद की दूसरी बड़ी अंतरराष्ट्रीय जांच है, जो ग्रुप की वैश्विक छवि और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर सवाल उठा रही है। अडानी ग्रुप ने हमेशा आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि कोई ब्राइबरी या करप्शन चार्ज उनके खिलाफ नहीं है।
सकारात्मक अपडेट्स के बीच यह संकट
इसी समय अडानी ग्रुप कुछ पॉजिटिव डेवलपमेंट्स भी दिखा रहा है:
- अडानी एंटरप्राइजेज ने तीसरी पब्लिक NCD इश्यू लॉन्च की, जिसमें 1000 करोड़ रुपये जुटाए जा रहे हैं (ब्याज दर 8.90% तक)। इश्यू 6-19 जनवरी 2026 तक खुला।
- अडानी ग्रीन एनर्जी ने गुजरात के खावड़ा में 307.4 MW रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स चालू किए, जो
- 1 जनवरी 2026 से बिजली उत्पादन शुरू कर चुके हैं।
- अडानी टोटल गैस के Q3FY26 रिजल्ट्स में EBITDA 15% बढ़कर 313 करोड़ रुपये हुआ।
ये विकास ग्रुप की ग्रोथ स्टोरी को मजबूत करते हैं, लेकिन SEC जांच ने शॉर्ट-टर्म में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
SEC की यह कार्रवाई अडानी ग्रुप के लिए नया कानूनी और मार्केट चैलेंज है। जबकि ग्रुप मजबूत फंडामेंटल्स और
एक्सपैंशन प्लान्स दिखा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जांच से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
आने वाले दिनों में कोर्ट की मंजूरी और ग्रुप का रिस्पॉन्स निर्णायक होगा।
निवेशकों को सलाह है कि वे लेटेस्ट अपडेट्स पर नजर रखें और रिस्क मैनेजमेंट करें।
अडानी ग्रुप का भविष्य अब इस जांच के नतीजे पर काफी हद तक निर्भर करेगा
