बदायूं में बवाल
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में 16 जनवरी 2026 की सुबह एक धार्मिक प्रभात फेरी को लेकर बड़ा बवाल हो गया। पुलिस द्वारा फेरी रोकने के प्रयास के दौरान ग्रामीणों और पुलिस बल के बीच जोरदार झड़प हुई, जिसमें लाठीचार्ज और पथराव हुआ। इस घटना में कम से कम 15-20 लोग घायल हो गए, जिनमें ग्रामीण और कुछ पुलिसकर्मी शामिल हैं। पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
घटना का विवरण: क्या हुआ प्रभात फेरी के साथ?
बदायूं के एक ग्रामीण क्षेत्र (कुछ रिपोर्ट्स में बिसौली थाना क्षेत्र के पास का गांव बताया जा रहा है) में स्थानीय राम भक्तों और ग्रामीणों ने सुबह प्रभात फेरी निकालने की तैयारी की थी। यह फेरी पारंपरिक रूप से गांव की गलियों से गुजरती है और धार्मिक भजन-कीर्तन के साथ निकाली जाती है। लेकिन पुलिस को सूचना मिली कि फेरी के रूट पर संवेदनशील इलाका है और कुछ विरोधी समूहों द्वारा विरोध की आशंका है।
पुलिस ने प्रशासनिक आदेश का हवाला देकर फेरी को रोकने की कोशिश की। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और आगे बढ़ने पर अड़े रहे, तो बात बढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने बिना उचित कारण के बल प्रयोग किया, जबकि पुलिस का कहना है कि भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया और स्थिति को संभालने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।
लाठीचार्ज और घायलों की संख्या
झड़प में पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे कई ग्रामीणों को चोटें आईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि 10 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें बदायूं जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ महिलाओं और बुजुर्गों पर भी लाठी चली, जिससे गांव में भारी आक्रोश है। दूसरी ओर, पुलिस ने भी पथराव में 4-5 जवान घायल होने की पुष्टि की है।
घटना के बाद गांव में पथराव और नारेबाजी हुई। कुछ युवाओं ने पुलिस वाहनों पर पथराव किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। शाम तक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए PAC और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
स्थानीय लोगों और नेताओं की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि
पुलिस पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है। वहीं, प्रशासन का कहना है
कि शांति बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।
स्थानीय विधायक और कुछ राजनीतिक दलों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कई संगठनों ने प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
तनाव और सुरक्षा व्यवस्था
घटना के बाद पूरे इलाके में कर्फ्यू जैसा माहौल है।
दुकानें बंद हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और जांच के आदेश दिए हैं।
उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी,
लेकिन फिलहाल तनाव बरकरार है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि धार्मिक
आयोजनों के दौरान संवेदनशील इलाकों में बेहतर समन्वय और संवाद की कितनी जरूरत है।
बदायूं प्रशासन पर अब बड़ी जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष जांच करे और दोषियों को सजा दे।
