ड्राफ्ट लिस्ट में 2.89 करोड़ नाम कटे
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की ड्राफ्ट लिस्ट जारी कर दी है। इसमें करीब 2.89 करोड़ नाम कटे हैं, जिसके बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। पहले 11 राज्यों में इस अभियान के तहत 3.69 करोड़ नाम हटाए गए थे। अब मतदाताओं को 30 दिनों का समय दिया गया है कि वे अपने नाम की जांच करें और अगर नाम कटा है तो दावा-आपत्ति दर्ज कराएं। इस ब्लॉग में हम यूपी SIR की पूरी डिटेल्स, नाम कटने के कारण, प्रक्रिया और क्या करना चाहिए, इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
ड्राफ्ट लिस्ट में कितने नाम कटे और क्यों?
चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया गया। पहले की सूची में कुल मतदाता लगभग 15.44 करोड़ थे, लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट में 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने के बाद अब कुल वोटर्स 12.55 करोड़ रह गए हैं। यह करीब 18.7% की कटौती है।
नाम कटने के मुख्य कारण हैं:
- मृत मतदाताओं के नाम।
- एक ही व्यक्ति का कई जगह रजिस्ट्रेशन (डुप्लीकेट एंट्री)।
- स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोग।
- फर्जी या गलत एंट्री।
- 18 साल से कम उम्र के नाम जो गलती से शामिल थे।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने के लिए की गई है, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और फर्जी वोटिंग रोकी जा सके। इससे पहले देश के 11 राज्यों में SIR के तहत कुल 3.69 करोड़ नाम हटाए गए थे, जिसमें यूपी का हिस्सा सबसे बड़ा है।
अब क्या करें? 30 दिन में दावा-आपत्ति की प्रक्रिया
ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद चुनाव आयोग ने 30 दिनों का समय दिया है। इस दौरान कोई भी मतदाता अपनी सूची जांच सकता है और अगर नाम कटा है या कोई गड़बड़ी है तो दावा-आपत्ति दर्ज करा सकता है। अंतिम मतदाता सूची इसी के बाद प्रकाशित होगी।
नाम जांचने और दावा दर्ज करने के तरीके:
- आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं।
- Voter Helpline App डाउनलोड करें।
- अपने ब्लॉक या तहसील स्तर के BLO (Booth Level Officer) से संपर्क करें।
- फॉर्म 6 (नया रजिस्ट्रेशन), फॉर्म 7 (नाम हटवाने के लिए), फॉर्म 8 (सुधार के लिए) भरें।
- आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार, राशन कार्ड, बिजली बिल आदि साथ रखें।
चुनाव आयोग ने अपील की है कि सभी मतदाता अपनी सूची जरूर चेक करें। खासकर युवा मतदाता जो पहली बार वोट डालने वाले हैं, वे अपना नाम जोड़वाएं।
पहले 11 राज्यों में क्या हुआ था?
यूपी से पहले 11 राज्यों में SIR अभियान चलाया गया, जहां कुल 3.69 करोड़ नाम हटाए गए। इन राज्यों में भी मृत, डुप्लीकेट और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम मुख्य थे। यह राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूची शुद्धिकरण का हिस्सा है। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले पूरी सूची अद्यतन हो जाए।
प्रभाव और राजनीतिक चर्चा
इस बड़े पैमाने पर नाम कटने से राजनीतिक हलचल मच गई है। विपक्षी दल इसे लक्षित कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे सूची शुद्धिकरण का जरूरी कदम मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वोटिंग प्रतिशत बढ़ सकता है, क्योंकि फर्जी वोट कम होंगे। लेकिन जिनके नाम कट गए हैं, उन्हें परेशानी हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी से कई वैध मतदाता नाम जोड़वाने से चूक सकते हैं। NGOs और राजनीतिक दल कैंप लगा रहे हैं।
आगे की प्रक्रिया और सलाह
30 दिनों के बाद प्राप्त दावों-आपत्तियों की जांच होगी और अंतिम सूची जनवरी-फरवरी 2026 में जारी हो सकती है।
सभी मतदाताओं से अपील है कि जल्द से जल्द अपनी स्थिति चेक करें।
अगर नाम है तो अच्छा, नहीं तो तुरंत फॉर्म भरें।
निष्कर्ष में, SIR अभियान लोकतंत्र को मजबूत बनाने का प्रयास है। 2.89 करोड़ नाम कटना बड़ा आंकड़ा है,
लेकिन शुद्ध सूची से सही मतदान सुनिश्चित होगा। अपना वोट अधिकार है,
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