उत्तर प्रदेश में पैथोलॉजी जांच
उत्तर प्रदेश में पैथोलॉजी जांच पर बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए एक बड़ी अच्छी खबर है। राज्य सरकार और लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) ने पैथोलॉजी जांच को काफी सस्ता करने की योजना बनाई है। अगले छह महीनों के भीतर पैथोलॉजी जांच की दरें 40 फीसदी तक कम हो सकती हैं। KGMU में जल्द ही हेल्थ रिफॉर्म फंड (HRF) की तर्ज पर इन्वेस्टिगेशन रिफॉर्म फंड (IRF) शुरू किया जाएगा। इससे मरीजों को सस्ती दवाओं की तरह सस्ती जांच भी उपलब्ध होगी। यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए बहुत बड़ी राहत साबित होगा, क्योंकि आजकल पैथोलॉजी जांच पर लाखों रुपये खर्च होने लगे हैं।
KGMU में IRF क्या है और कैसे काम करेगा?
KGMU, जो उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान है, में IRF की शुरुआत से पैथोलॉजी जांच की लागत में भारी कमी आएगी। HRF की तरह IRF भी एक विशेष फंड होगा, जो जांचों पर सब्सिडी देगा। मुख्य बिंदु:
- जांच दरों में 30 से 40% तक की कटौती।
- आम मरीजों के लिए सब्सिडाइज्ड रेट्स, खासकर गरीब परिवारों के लिए।
- सभी प्रकार की जांच जैसे ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, बायोप्सी, सीटी स्कैन, MRI आदि पर लागू।
- फंड का इस्तेमाल जांच मशीनों के अपग्रेड, रसायनों की खरीद और स्टाफ ट्रेनिंग पर होगा।
*KGMU के अधिकारियों ने बताया कि IRF के जरिए जांच की गुणवत्ता बनी रहेगी, लेकिन लागत कम होगी। यह मॉडल अन्य सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में भी लागू किया जा सकता है। योजना के अनुसार, अगले 6 महीने में IRF पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा और मरीजों को तुरंत फायदा मिलना शुरू हो जाएगा।
मरीजों को मिलने वाले फायदे
इस योजना से उत्तर प्रदेश के लाखों मरीजों को सीधा लाभ होगा। मुख्य फायदे:
- आर्थिक राहत: पहले जहां एक जांच पर 1000-5000 रुपये खर्च होते थे, अब 40% कम में हो जाएगी। गरीब मरीजों को निजी लैब्स पर निर्भरता कम होगी।
- समय की बचत: KGMU और अन्य सरकारी अस्पतालों में ही सस्ती और विश्वसनीय जांच मिलेगी, बाहर जाने की जरूरत नहीं।
- बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं: सस्ती जांच से लोग समय पर जांच करवा सकेंगे, जिससे बीमारियां जल्दी पकड़ में आएंगी।
- सस्ती दवाओं के बाद अब जांच: राज्य में पहले से जन औषधि केंद्रों से सस्ती दवाएं मिल रही हैं। अब जांच भी उसी तर्ज पर सस्ती हो रही है।
यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सुधार नीति का हिस्सा है, जिसमें गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने पर जोर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कई योजनाएं शुरू की हैं, और IRF इसी दिशा में एक नया कदम है।
योजना की समयसीमा और विस्तार
- अगले 6 महीने: IRF का फुल रोलआउट, KGMU में पायलट प्रोजेक्ट शुरू।
- 2026 के अंत तक: अन्य मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में विस्तार।
- लंबे समय का लक्ष्य: पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी जांच 40-50% सस्ती।
KGMU के निदेशक ने कहा कि यह योजना मरीजों की जेब पर बोझ कम करने के साथ-साथ जांच की गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में नया दौर
उत्तर प्रदेश में पैथोलॉजी जांच 40 फीसदी तक सस्ती होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
KGMU में IRF शुरू होने से सस्ती दवाओं की तरह सस्ती जांच भी अब हकीकत बनेगी।
यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के लिए वरदान साबित होगा।
अगले छह महीनों में जब IRF पूरी तरह लागू हो जाएगा, तो लाखों मरीजों को आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी।
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है –
सस्ती और बेहतर सेवाएं अब हर किसी की पहुंच में।