सुल्तानपुर कोर्ट
सुल्तानपुर कोर्ट से लखनऊ लौटते समय राहुल गांधी मोची की दुकान पर रुके। उन्होंने बेटे राघव से बात करके इनके पिता रामचेत की मौत पर शोक संवेदना व्यक्त की। आगे पढ़ें पूरी खबर… अमित शाह पर टिप्पणी के मामले में सुल्तानपुर कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद राहुल गांधी लखनऊ वापस लौट रहे थे। इसी दौरान उन्होंने सड़क किनारे एक मोची की दुकान पर रुककर मानवीय संवेदना दिखाई।
घटना का विवरण और राहुल का रुकना
सुल्तानपुर कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद राहुल गांधी सड़क मार्ग से लखनऊ की ओर बढ़े। रास्ते में सुल्तानपुर-लखनऊ हाईवे पर एक छोटी सी मोची की दुकान के सामने उनका काफिला रुका। दुकानदार रामचेत की कुछ दिन पहले मौत हो गई थी। राहुल ने दुकान पर मौजूद रामचेत के बेटे राघव से बात की और पिता की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने राघव को ढांढस बंधाया और परिवार के प्रति संवेदना जताई। यह मुलाकात मात्र कुछ मिनट की थी, लेकिन इसने राहुल गांधी की संवेदनशील छवि को फिर से उजागर किया।
रामचेत की मौत और परिवार की स्थिति
रामचेत एक साधारण मोची थे, जो सुल्तानपुर-लखनऊ रोड पर अपनी छोटी दुकान चलाते थे। उनकी मौत हाल ही में दिल का दौरा पड़ने से हुई। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और राघव अब दुकान संभाल रहा है। राहुल गांधी की यह मुलाकात आम आदमी के दुख-दर्द में शामिल होने का प्रतीक बनी। कांग्रेस समर्थकों ने इसे राहुल की जमीन से जुड़ाव वाली छवि का प्रमाण बताया।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
राहुल गांधी का यह कदम कोर्ट केस के बीच भी आम लोगों से जुड़ने का संदेश देता है। अमित शाह पर टिप्पणी के हाई-प्रोफाइल मामले के बाद राहुल का यह व्यवहार राजनीतिक विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर सकता है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस घटना को वायरल किया और कहा कि राहुल “जननेता” हैं। वहीं कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे स्टंट करार दिया,
लेकिन आम लोगों ने इसे सच्ची संवेदना माना।
राहुल गांधी की यात्रा और सुरक्षा
कोर्ट से लौटते समय राहुल का काफिला सुरक्षा के कड़े घेरे में था।
फिर भी उन्होंने रुककर राघव से बात की।
कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने बताया कि राहुल ने राघव को मदद का भरोसा भी दिया। यह घटना राहुल की
“भारत जोड़ो” यात्रा जैसी पहलों से जुड़ी उनकी छवि को मजबूत करती है।
सुल्तानपुर कोर्ट केस के बीच राहुल गांधी का मोची की दुकान पर रुकना और
रामचेत की मौत पर शोक जताना एक छोटी लेकिन प्रभावशाली घटना है। यह दिखाता है कि
राजनीति के बीच भी मानवीय संवेदना बरकरार रखना कितना महत्वपूर्ण है।
राघव और उसके परिवार के लिए यह मुलाकात बड़ी राहत और सम्मान की बात रही।
राहुल गांधी की ऐसी छोटी-छोटी संवेदनाएं ही उन्हें जनता के करीब लाती हैं।
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