UP News: 25 साल तक “सलीम” बनकर जिए ओम प्रकाश, SIR ने ढूंढ निकाला; शुद्धिकरण के बाद फिर बने हिंदू, मां से गले मिलकर रोए
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गोरखपुर के ओम प्रकाश 25 साल पहले घर से भागे थे, लखनऊ में मुस्लिम परिवार ने गोद लेकर नाम रखा सलीम। दिसंबर 2025 में गोरखपुर SIR ने परिजनों से मिलवाया। वैदिक शुद्धिकरण के बाद फिर हिंदू बने। मां-बेटे का भावुक मिलन, पूरी सच्ची कहानी। (149 characters)
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परिचय: 25 साल का इंतजार खत्म, मां के आंचल में फिर लौटा बेटा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरीचौरा क्षेत्र में 30 नवंबर 2025 को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जो हर आंख को नम कर गया। ढाई दशक पहले घर से भागा 13 साल का बालक ओम प्रकाश, जो 25 साल तक लखनऊ में “सलीम” बनकर जिया, आखिरकार अपने गांव लौट आया। गोरखपुर के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रूम (SIR) की टीम ने उसे उसके मूल परिवार से मिलवाया। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के बीच शुद्धिकरण करवाकर उसने फिर से हिंदू धर्म अपनाया और अपना असली नाम “ओम प्रकाश” वापस लिया। मां के गले लगते ही दोनों फूट-फूटकर रो पड़े। यह कहानी किसी फिल्म से कम नहीं।
25 साल पहले गायब हुआ था मासूम ओम प्रकाश
साल 2000 में ओम प्रकाश चौरीचौरा थाना क्षेत्र के बिशुनपुरा गांव का 13 साल का लड़का था। 10वीं की परीक्षा के बाद घर में झगड़े से दुखी होकर वह घर से भाग गया। गोरखपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर लखनऊ पहुंच गया। वहां स्टेशन पर भटकते बच्चे को एक मुस्लिम परिवार ने गोद ले लिया। परिवार ने उसका नाम बदलकर “सलीम” रख दिया और इस्लाम धर्म की कुछ रस्में करा दीं।
ओम प्रकाश उर्फ सलीम ने बताया, “मैं छोटा था, कुछ समझ नहीं आया। मुझे खाना-कपड़ा और प्यार मिल रहा था, इसलिए वहीं रह गया। धीरे-धीरे मैं सलीम बन गया। शादी की, दो बच्चे हुए, लेकिन अंदर से हमेशा मां-बाप की याद सताती थी।”
SIR की मेहनत: कैसे ढूंढ निकाला परिवार?
नवंबर 2025 में सलीम ने लखनऊ में एक सामाजिक कार्यकर्ता से अपनी पुरानी यादें साझा कीं। कार्यकर्ता ने गोरखपुर SIR के इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह से संपर्क किया। SIR टीम ने 25 साल पुरानी मिसिंग रिपोर्ट खंगाली, गांव-गांव पता किया और आखिरकार बिशुनपुरा में ओम प्रकाश के परिवार को ढूंढ निकाला।
परिवार को जब फोन पर खबर दी गई तो पहले यकीन ही नहीं हुआ। ओम प्रकाश की मां आज भी रोज मंदिर जाकर बेटे की सलामती मांगती थीं। जब सलीम ने फोन पर मां को “माई” कहा तो मां की चीख निकल गई।
30 नवंबर 2025: वह ऐतिहासिक दिन
गोरखपुर के एक प्राचीन मंदिर में सुबह से ही तैयारी चल रही थी।
आर्य समाज के पंडितों ने वैदिक विधि से शुद्धिकरण की पूरी तैयारी की।
- मुंडन कराया गया
- हवन-पूजन हुआ
- जनेऊ पहनाया गया
- गंगा जल से स्नान कराया गया
- नए कपड़े पहनाए गए
इसके बाद आधिकारिक रूप से “सलीम” फिर से “ओम प्रकाश” बन गया। मां ने रोते-रोते बेटे को सीने से लगाया।
पूरा गांव इकट्ठा था, ढोल-नगाड़े बज रहे थे।
ओम प्रकाश ने कहा,
“मैंने कभी दिल से इस्लाम नहीं अपनाया था।
आज मैं अपने घर, अपने धर्म, अपनी मां के पास वापस आ गया।”
परिवार का नया फैसला
ओम प्रकाश की पत्नी और दोनों बच्चे भी जल्द ही हिंदू धर्म अपनाने को तैयार हैं।
वे भी गांव में ही बसने की योजना बना रहे हैं।
मां ने कहा, “मेरा बेटा लौट आया, अब पोते-पोतियां भी आएंगी। इससे बड़ा सुख क्या होगा?”
घर वापसी के बढ़ते मामले
योगी सरकार के आने के बाद उत्तर प्रदेश में घर वापसी के 600 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।
ज्यादातर मामले बचपन में भटकाव, गरीबी या पारिवारिक कलह के हैं।
धर्म जागरण समन्वय और आर्य समाज सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं।
