रक्त से होगी कैंसर की पहचान, सिर्फ 6 घंटे में मिलेगा परिणाम
बरेली। कैंसर जैसी घातक बीमारी की शुरुआती पहचान अब रक्त परीक्षण से मात्र 6 घंटे में संभव हो जाएगी। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) बरेली के वैज्ञानिकों ने एक नई किट विकसित की है, जो रक्त के सैंपल से कैंसर के बायोमार्कर्स का पता लगाएगी। अमर उजाला की 8 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, यह किट IVRI के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के डॉ. राजेश कुमार और उनकी टीम ने बनाई है। यूपी में कैंसर के बढ़ते मामलों (2025 में 1.5 लाख नई डिटेक्शन) के बीच यह आविष्कार जीवन रक्षक साबित हो सकता है। किट की कीमत मात्र 500-800 रुपये होगी, जो आम आदमी के लिए सुलभ है। यह ब्लॉग किट की पूरी जानकारी, कैसे काम करती है, लाभ, चुनौतियां और उपलब्धता पर फोकस करता है। यदि आप कैंसर जागरूकता या स्वास्थ्य से जुड़े हैं, तो ये अपडेट्स आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।
IVRI बरेली का नया आविष्कार: रक्त परीक्षण से 6 घंटे में कैंसर डिटेक्शन
IVRI बरेली, जो पशु चिकित्सा में विश्व प्रसिद्ध है, ने अब मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में कदम रखा है। डॉ. राजेश कुमार की टीम ने 2 साल की रिसर्च के बाद ‘कैंसर-ट्रैक किट’ विकसित की। यह किट रक्त में सर्कुलेटिंग ट्यूमर डीएनए (ctDNA) और प्रोटीन बायोमार्कर्स का पता लगाती है। मुख्य फीचर्स:
- समय: पारंपरिक बायोप्सी में 7-10 दिन लगते हैं, यहां 6 घंटे में रिपोर्ट।
- सटीकता: 92% एक्यूरेसी, शुरुआती स्टेज (1-2) कैंसर डिटेक्ट।
- लागत: 500-800 रुपये, सरकारी लैब्स में सब्सिडी पर।
- टारगेट कैंसर: ब्रेस्ट, लंग, कोलन और लिवर कैंसर।
डॉ. कुमार ने कहा, “यह किट पशु कैंसर रिसर्च से प्रेरित है। यूपी जैसे राज्यों में जहां कैंसर सेंटर कम हैं, यह ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान है।”
किट कैसे काम करती है? सरल प्रक्रिया
किट की प्रक्रिया आसान है:
- रक्त सैंपल (5 ml) लिया जाता है।
- किट में बिल्ट-इन ELISA टेस्ट ctDNA को आइसोलेट करता है।
- PCR-बेस्ड एम्प्लिफिकेशन से बायोमार्कर्स एनालाइज।
- 6 घंटे में डिजिटल रिपोर्ट – पॉजिटिव/नेगेटिव और स्टेज इंडिकेशन। यह किट पोर्टेबल है, छोटे लैब्स में यूज हो सकती है। IVRI ने 100 मरीजों पर ट्रायल किया, जहां 90% सटीक परिणाम मिले।
कैंसर डिटेक्शन के लाभ: शुरुआती पहचान से जीवन बचाव
कैंसर की 70% मौतें देरी से डिटेक्शन से होती हैं। यह किट के लाभ:
- शुरुआती स्टेज डिटेक्शन: स्टेज 1-2 में 85% सफलता, कीमोथेरेपी से पहले इलाज संभव।
- ग्रामीण पहुंच: यूपी के 75 जिलों में लैब्स में उपलब्ध।
- कम लागत: CT स्कैन (5,000 रुपये) से सस्ता।
- सुरक्षित: बिना इनवेसिव बायोप्सी। IVRI के अनुसार, 2025 में यूपी में 1.5 लाख कैंसर केस, जिनमें 60% देरी से डिटेक्ट। यह किट 50% मौतें रोक सकती है।