राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
संघ की नई संगठनात्मक संरचना में यूपी-उत्तराखंड उत्तर क्षेत्र होगा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने देशभर में अपने संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव का खाका तैयार किया है। इसमें सबसे अहम बदलाव उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संगठनात्मक ढांचे में किया गया है। नई संरचना में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर उत्तर क्षेत्र बनाने का फैसला लिया गया है। यह क्षेत्र संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दोनों राज्यों में संघ की शाखाओं और कार्यकर्ताओं की संख्या काफी अधिक है।
पानीपत में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में मुहर लगी
हरियाणा के पानीपत (समालखा) में 13 से 15 मार्च 2026 तक चली तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) के अंतिम दिन रविवार को संगठनात्मक बदलाव के प्रस्ताव पर मुहर लग गई। इस बैठक में संघ के शीर्ष नेता, सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित देशभर से आए करीब 1487 प्रतिनिधि और 32 अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में संगठन विस्तार, सामाजिक कार्यक्रमों और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रस्ताव को एकमत से पास किया गया। अब प्रांत स्तर की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर क्षेत्र और संभाग स्तर से संघ का काम संचालित होगा। देश में प्रांतों की जगह करीब 80 संभाग बनाए जाएंगे, जिससे ग्रासरूट स्तर पर अधिक प्रभावी निगरानी और कार्य संभव होगा।
विधानसभा चुनाव के बाद लागू होगी नई व्यवस्था
यह बदलाव विधानसभा चुनाव के बाद अगले साल मार्च से लागू किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव इस नई संरचना का पहला बड़ा परीक्षण होगा। नई व्यवस्था से संगठन अधिक विकेंद्रीकृत और माइक्रो-लेवल पर मजबूत होगा। यूपी में मौजूदा छह प्रांतों को नौ संभागों में व्यवस्थित किया जा सकता है, जो प्रशासनिक संभागों से जुड़े होंगे। प्रत्येक संभाग में अलग प्रचारक होगा, लेकिन एक राज्य प्रचारक की देखरेख में।
उत्तराखंड को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ जोड़कर उत्तर क्षेत्र बनाया जा रहा है।
यह क्षेत्र संघ के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां शाखाओं की संख्या और कार्यकर्ता आधार मजबूत है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
आरएसएस का यह कदम संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास है। पुरानी प्रांत व्यवस्था में बदलाव से
पदाधिकारियों की संख्या कम होगी, लेकिन जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव स्तर पर प्रचारकों को बढ़ाया जाएगा।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संघ का विस्तार तेज होगा। बैठक में
सामाजिक सद्भाव, हिंदू समाज संगठन और भविष्य की चुनौतियों पर भी फोकस रहा।
निष्कर्ष: संघ का नया दौर, 2027 चुनाव पर असर
आरएसएस की यह नई संगठनात्मक संरचना यूपी-उत्तराखंड को एक मजबूत इकाई बनाएगी। पानीपत बैठक में
लिए गए फैसले से संघ का ग्रासरूट कनेक्शन और मजबूत होगा। विधानसभा चुनाव के बाद लागू होने वाली
यह व्यवस्था 2027 के यूपी चुनावों में संगठन की ताकत को और बढ़ाएगी।
यह बदलाव संघ की 100 वर्षीय यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ रहा है,
जहां विकेंद्रीकरण और माइक्रो-मैनेजमेंट पर जोर है।
