UP में ISI का बड़ा जासूसी नेटवर्क पकड़ा गया
उत्तर प्रदेश में ISI के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। गाजियाबाद पुलिस द्वारा जासूसी के आरोप में पकड़े गए बुटराड़ा गांव निवासी समीर और अन्य से पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि नेपाल, दुबई, अमेरिका और बांग्लादेश जैसे देशों से यह नेटवर्क संचालित हो रहा था। जांच एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, विदेश में बैठे एजेंट भारत के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे थे।
गाजियाबाद पुलिस का बड़ा खुलासा
गाजियाबाद पुलिस ने समीर को गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ शुरू की। जांच में सामने आया कि समीर को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और ISI हैंडलर सरफराज, सरदार के नाम से बनाए गए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में जोड़ा गया था। इन ग्रुपों के जरिए देश-विदेश में रह रहे युवाओं को जोड़कर उन्हें अलग-अलग काम सौंपे जाते थे।
दुबई में बैठे एजेंटों को शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, दिल्ली, सहारनपुर, बिजनौर, हरियाणा और बिहार के युवाओं को ग्रुप में शामिल करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, ISI हैंडलर पहचान छिपाने के लिए हिंदू नाम इस्तेमाल कर रहे थे। ग्रुपों को गैंगस्टरों के नाम पर इसलिए बनाया गया था ताकि पुलिस को इन पर शक न हो और गतिविधियां आसानी से चलती रहें।
ग्रुप में तबलीगी जमात और अन्य धार्मिक गतिविधियों से संबंधित वीडियो शेयर की जाती थीं,
जिससे युवाओं को प्रभावित कर उनका ब्रेनवाश किया जा सके। युवाओं को धार्मिक स्थलों और
सेना से जुड़े स्थानों की फोटो और वीडियो जुटाने के निर्देश दिए जाते थे।
तीन किस्तों में मिले रुपए
पूछताछ में यह भी सामने आया कि युवाओं को काम के बदले पैसे दिए जाते थे।
ये पैसे तीन किस्तों में ट्रांसफर किए जाते थे। विदेश से संचालित होने के कारण
नेटवर्क काफी जटिल था और युवा आसानी से इस जाल में फंस जाते थे।
नेटवर्क का संचालन कैसे हो रहा था?
- नेपाल, दुबई और अमेरिका से मुख्य रूप से नेटवर्क नियंत्रित किया जा रहा था।
- युवाओं को व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए जोड़ा जाता था।
- गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और ISI हैंडलर सरफराज, सरदार जैसे नामों का इस्तेमाल पहचान छिपाने के लिए किया जाता था।
- युवाओं को संवेदनशील जगहों की फोटो-वीडियो भेजने के काम सौंपे जाते थे।
जांच एजेंसियों की सक्रियता
गाजियाबाद पुलिस की तेज कार्रवाई से यह बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सामने आया है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां
अब पूरे नेटवर्क को पूरी तरह से उजागर करने और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। युवाओं को धार्मिक उन्माद और
ब्रेनवाश के जरिए जासूसी के काम में लगाने की साजिश को पुलिस ने समय रहते पकड़ लिया है।
समाज और युवाओं के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सोशल मीडिया पर अजनबियों के ग्रुप में शामिल होने और
अनजान लोगों से पैसे लेकर काम करने से पहले सतर्क रहना बेहद जरूरी है। युवाओं को किसी भी संदिग्ध गतिविधि में
शामिल होने से बचना चाहिए और शक होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए।
