मायावती का कांग्रेस पर हमला
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कांग्रेस पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी सोच के कारण बसपा की स्थापना करनी पड़ी। यह बयान 14 मार्च 2026 को कांशीराम जयंती के मौके पर आया, जब मायावती ने कांग्रेस की केंद्र सरकारों की आलोचना की। उन्होंने दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव अम्बेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न न देने का मुद्दा उठाया। यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां दलित वोट बैंक अहम है। मायावती का यह हमला कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर सवाल उठाता है और बसपा की स्थापना के ऐतिहासिक संदर्भ को याद दिलाता है।
कांग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता: मायावती का आरोप
मायावती ने शनिवार को कहा, “जैसा कि सर्वविदित है कि कांग्रेस पार्टी ने काफी वर्षों तक केन्द्र की सत्ता में रहकर दलितों के मसीहा व भारतीय संविधान के मूल निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का कभी भी आदर-सम्मान नहीं किया और ना ही उनको ’भारतरत्न’ की उपाधि से भी सम्मानित किया।” उन्होंने कांग्रेस की केंद्र सरकारों पर आरोप लगाया कि वे दलितों के हितों की अनदेखी करती रहीं। मायावती के मुताबिक, कांग्रेस की यह मानसिकता इतनी गहरी थी कि बसपा जैसी पार्टी की स्थापना जरूरी हो गई। बसपा 1984 में कांशीराम द्वारा स्थापित हुई, जो दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ती है। मायावती ने पूछा, “जब ये केंद्र में थे इन्होंने क्या किया?” यह सवाल कांग्रेस की पुरानी सरकारों पर सीधा प्रहार है, जहां अम्बेडकर को सम्मान न देने को दलित विरोधी बताया गया।
अम्बेडकर और कांशीराम को भारत रत्न न देने का मुद्दा
मायावती ने आगे कहा, “भला फिर यह पार्टी अब मान्यवर श्री कांशीराम जी को कैसे इस उपाधि से सम्मानित कर सकती है?” कांशीराम, बसपा के संस्थापक, दलित आंदोलन के प्रमुख नेता थे। मायावती का आरोप है कि कांग्रेस ने अम्बेडकर को भारत रत्न देने में देरी की और कांशीराम को पूरी तरह अनदेखा किया। अम्बेडकर को 1990 में भारत रत्न मिला, जब कांग्रेस सत्ता में नहीं थी। मायावती ने कांग्रेस की इस नीति को दलितों के प्रति उदासीनता बताया। यह बयान कांशीराम जयंती पर आया, जब बसपा कार्यकर्ता उनके योगदान को याद करते हैं। कांशीराम ने दलितों को राजनीतिक ताकत दी, लेकिन कांग्रेस ने उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश की, ऐसा मायावती का दावा है।
बसपा की स्थापना का ऐतिहासिक संदर्भ
बसपा की स्थापना कांग्रेस की दलित विरोधी नीतियों के खिलाफ एक प्रतिक्रिया थी। मायावती ने कहा कि कांग्रेस की सत्ता में दलितों को सम्मान न मिलने से कांशीराम ने नई पार्टी बनाई। बसपा ने उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार बनाई, जहां दलितों के लिए आरक्षण और कल्याण योजनाएं लागू की गईं। मायावती का यह बयान 2027 UP चुनावों से पहले महत्वपूर्ण है, जहां बसपा दलित वोट को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस पर यह आरोप पुराना है,
लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में नया रंग ले रहा है।
राजनीतिक प्रभाव और विपक्ष की प्रतिक्रिया
मायावती का बयान कांग्रेस के लिए चुनौती है, जो खुद को
दलित हितैषी बताती है। कांग्रेस ने जवाब में कहा कि
अम्बेडकर को सम्मान देने में उनकी भूमिका थी, लेकिन मायावती इसे नकारती हैं। यह विवाद दलित
राजनीति को प्रभावित कर सकता है, जहां बसपा, सपा और कांग्रेस वोट बांट रही हैं
। मायावती ने कांग्रेस को “संविधान का नाटक” करने वाली पार्टी बताया।
मायावती का कांग्रेस पर यह हमला दलित राजनीति की गहराई दिखाता है। बसपा की स्थापना दलितों के
सम्मान की लड़ाई थी, और मायावती इसे जारी रख रही हैं। क्या कांग्रेस इस आरोप का जवाब देगी?
यह समय बताएगा, लेकिन दलित वोटर्स के लिए यह महत्वपूर्ण मुद्दा है।
