उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन
प्रदेश में धार्मिक पर्यटन अब केवल आस्था ही नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाला सबसे बड़ा इंजन बन गया है। टेंपल इकॉनमी मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि अगर धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ा दी जाएं, तो आस्था और अर्थतंत्र दोनों मजबूत होते हैं। इसका उदाहरण मथुरा-वृंदावन है, जहां पिछले वर्ष रिकॉर्ड 9.3 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे।
मथुरा-वृंदावन में रिकॉर्ड श्रद्धालु प्रवाह
2025 में मथुरा-वृंदावन में कुल 9.3 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो पिछले वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ चुका है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि, द्वारकाधीश मंदिर, प्रेम मंदिर, बांके बिहारी और राधा वल्लभ मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों पर भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ती गई। जनवरी से दिसंबर तक औसतन प्रतिदिन 2.5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। विशेष रूप से जन्माष्टमी, होली, दिवाली और राधाष्टमी जैसे पर्वों पर लाखों की संख्या में भक्त एक साथ जुटे।
टेंपल इकॉनमी का कमाल
योगी सरकार के टेंपल इकॉनमी मॉडल ने मथुरा-वृंदावन को नई पहचान दी। पिछले कुछ वर्षों में सड़कें चौड़ी की गईं, पार्किंग, यात्री सुविधा केंद्र, स्वच्छता अभियान और सीसीटीवी-लाइटिंग की व्यवस्था बढ़ाई गई। मथुरा-वृंदावन में नए होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और स्थानीय हस्तशिल्प बाजार फले-फूले। अनुमान है कि 2025 में धार्मिक पर्यटन से मथुरा जिले में करीब 15,000 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिला और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
सुविधाओं और सुरक्षा में सुधार
मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही सुविधाएं भी बढ़ीं। नए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन का विस्तार, ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू हुई। महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था, दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर और
ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम ने यात्रा को आसान बनाया। पुलिस और सुरक्षा बलों की
तैनाती बढ़ाने से अपराध दर घटी और भक्तों को सुरक्षित महसूस हुआ।
अन्य धार्मिक स्थलों पर भी प्रभाव
मथुरा-वृंदावन की सफलता ने अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे अन्य स्थलों को भी प्रेरित किया।
प्रदेश में धार्मिक पर्यटन अब 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का केंद्र बन चुका है।
टेंपल इकॉनमी मॉडल से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन राज्य बन गया है।
भविष्य की संभावनाएं
2026 में मथुरा-वृंदावन में और बड़े प्रोजेक्ट शुरू होने वाले हैं, जैसे वृंदावन में नया
पर्यटक परिसर और मथुरा में हेरिटेज वॉक। विशेषज्ञों का मानना है कि
यदि यही गति बनी रही तो अगले 5 वर्षों में श्रद्धालु संख्या 12 करोड़ को पार कर सकती है।
यह आंकड़े न केवल आस्था की ताकत दिखाते हैं, बल्कि साबित करते हैं कि
धार्मिक पर्यटन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान मिल सकती है।
मथुरा-वृंदावन अब केवल भगवान कृष्ण की नगरी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक शक्ति का प्रतीक बन चुका है।
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