UP: कोरोना काल में मदद कर जीत लिया था विश्वास… फैला दिया धर्मांतरण का मकड़जाल; कैसे होता था धर्म परिवर्तन?

कोरोना संकट में मदद का दुरुपयोग

*कोरोना महामारी (2020-2022) के दौरान जब पूरा देश लॉकडाउन और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गरीब, दलित और असहाय परिवारों को मदद के नाम पर जाल बिछाया गया। कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने राशन, पैसे, दवाइयां और अन्य सहायता देकर लोगों का विश्वास जीता और धीरे-धीरे उन्हें ईसाई या अन्य धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास किया। यह ‘धर्मांतरण मकड़जाल’ अब पुलिस जांच में खुलासे हो रहा है। यूपी में अवैध धर्म परिवर्तन रोकने के लिए 2021 का कानून लागू होने के बाद ऐसे मामलों पर सख्ती बढ़ी है, लेकिन पुराने नेटवर्क अभी भी सक्रिय थे।

कोरोना काल में कैसे जीता गया विश्वास?

महामारी के समय जब अस्पताल भरे थे और गरीब परिवारों के पास इलाज के पैसे नहीं थे, कुछ संस्थाएं और व्यक्ति सक्रिय हो गए। वे घर-घर जाकर:

  • मुफ्त राशन किट बांटते
  • दवाइयां और मास्क देते
  • आर्थिक मदद (कभी-कभी 5-10 हजार रुपये) प्रदान करते
  • बीमारों की देखभाल का वादा करते

यह मदद शुरू में बिना किसी शर्त के लगती थी। लोग कृतज्ञ होकर इनकी बात मानने लगते थे। धीरे-धीरे इन बैठकों में धार्मिक चर्चा शुरू हो जाती थी। जैसे-जैसे विश्वास गहराता, लोग प्रार्थना सभाओं में शामिल होने लगते और अंत में धर्म परिवर्तन के लिए तैयार हो जाते।

उदाहरण के तौर पर, मेरठ में 2022 में दर्ज FIR में आरोप था कि कोरोना काल में गरीब ठेला वालों को राशन और पैसे देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इसी तरह अन्य जिलों में भी ऐसे केस सामने आए।

कैसे चलता था धर्मांतरण का मकड़जाल?

हाल के खुलासों (जैसे कानपुर देहात 2026) से पता चलता है कि ऐसे नेटवर्क सालों से चल रहे थे और कोरोना ने उन्हें और मजबूत बनाया:

  • कमीशन मॉडल: नए लोगों को लाने वाले को 6,000 रुपये प्रति माह या प्रति व्यक्ति कमीशन मिलता था।
  • प्रलोभन: आर्थिक मदद, नौकरी, इलाज और ‘ईश्वर की कृपा’ का वादा।
  • धीरे-धीरे ब्रेनवॉश: पहले सिर्फ मदद, फिर धार्मिक कहानियां, अंत में बपतिस्मा या अन्य रस्म।
  • विदेशी फंडिंग: कई मामलों में अमेरिका, इंग्लैंड से फंडिंग का शक, जो संगठनों को सपोर्ट करता था।
  • स्किल ट्रेनिंग का बहाना: सिलाई, ब्यूटी पार्लर जैसी ट्रेनिंग देकर लोगों को जोड़ा जाता, फिर धर्म परिवर्तन।

कानपुर देहात के नवाकांती सोसाइटी मामले में पादरी, प्रिंसिपल और अकाउंटेंट गिरफ्तार हुए, जहां 10 साल से यह नेटवर्क चल रहा था।

यूपी सरकार की सख्ती और कानून

यूपी में 2021 से उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम लागू है।

इसमें जबरन, प्रलोभन या शादी के नाम पर धर्मांतरण पर 1-10 साल की सजा और जुर्माना है।

योगी सरकार की ‘मिशन अस्मिता’ के तहत

ATS और पुलिस ऐसे रैकेट्स पर लगातार कार्रवाई कर रही है।

कई मामलों में विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच चल रही है।

निष्कर्ष: सतर्कता जरूरी

कोरोना जैसे संकट में मदद करना नेक काम है, लेकिन इसका दुरुपयोग करके

धर्मांतरण का जाल फैलाना गैरकानूनी और सामाजिक सद्भाव के खिलाफ है।

ऐसे मामलों में पुलिस को सूचना दें और यूपी के एंटी-कन्वर्जन कानून का सहारा लें।

समाज को जागरूक रहना होगा ताकि विश्वास का दुरुपयोग न हो।